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पंजाब की मंडियों में आई 99 प्रतिशत धान की खरीद हो चुकी है: हरचंद सिंह बर्स्ट

पंजाब मंडी बोर्ड के अध्यक्ष स. हरचंद सिंह बर्स्ट ने खरीफ खरीद सीजन 2025-26 के दौरान राज्य की मंडियों में धान की फसल की चल रही खरीद प्रक्रिया की समीक्षा की। इस दौरान स. बर्स्ट ने कहा कि पंजाब राज्य की सभी मंडियों में धान की आवक, खरीद और उठान का कार्य सुचारू रूप से चल रहा है। किसानों, आढ़तियों, मजदूरों समेत किसी को भी मंडियों में किसी भी तरह की परेशानी नहीं होने दी जा रही है। मंडियों से उठान भी तेजी से हो रहा है। उन्होंने बताया कि मंडियों में आई लगभग 99 प्रतिशत फसल की खरीद हो चुकी है और लगभग 92 प्रतिशत खरीदी गई फसल का उठान भी हो चुका है। पंजाब राज्य में धान की सुचारू खरीद के लिए 152 मुख्य यार्ड, 283 उप यार्ड और 1387 खरीद केंद्र घोषित किए गए हैं और किसानों की सुविधा के लिए 715 अस्थायी खरीद केंद्र भी स्थापित किए गए हैं।

एस. बर्स्ट ने बताया कि 9 नवंबर तक मंडियों में 149.25 लाख मीट्रिक टन धान की फसल आ चुकी है और 147.62 लाख मीट्रिक टन की खरीद हो चुकी है, जिसमें से 147.39 लाख मीट्रिक टन धान सरकारी एजेंसियों द्वारा खरीदा गया है। मंडियों से लगभग 135.27 लाख मीट्रिक टन धान का उठान हो चुका है।

विभिन्न खरीद एजेंसियों द्वारा खरीदे गए धान के बारे में बताते हुए चेयरमैन ने बताया कि सबसे अधिक 62.31 लाख मीट्रिक टन धान की फसल पनग्रेन द्वारा खरीदी गई है। इसी प्रकार, मार्कफेड द्वारा 37.36 लाख मीट्रिक टन, पनसप द्वारा 30.68 लाख मीट्रिक टन, वेयरहाउस द्वारा 16.63 लाख मीट्रिक टन, एफसीआई द्वारा 0.41 लाख मीट्रिक टन और निजी व्यापारियों द्वारा 0.23 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की गई है। पिछले रविवार को 2.09 लाख मीट्रिक टन धान की फसल मंडियों में पहुँची, जबकि 2.17 लाख मीट्रिक टन की खरीद हो चुकी है और 3.41 लाख मीट्रिक टन धान का उठान हो चुका है।

उन्होंने कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री श्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार किसानों, आढ़तियों और मजदूरों के साथ खड़ी है। मंडियों में अपनी फसल लाने वाले किसानों को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े, इसके लिए राज्य की मंडियों में उचित व्यवस्था की गई है, ताकि किसान बिना किसी देरी के अपनी फसल बेच सकें। पंजाब सरकार किसानों की फसल थोक में खरीदने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि मंडियों में फसलों की थोक में खरीद की जा रही है और किसानों को सीधे उनके बैंक खातों में भुगतान किया जा रहा है।

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