
भारत सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के परामर्श से वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही (एच1) के लिए अपने ऋण योजना कार्यक्रम को अंतिम रूप दे दिया है।
वर्ष 2026-27 के बजट में सकल बाजार उधार 17.20 लाख करोड़ रुपये था। बजट प्रस्तुत होने के बाद से, ग्रीन सिक्योरिटीज (जी-सेक) के हस्तांतरण के कारण सकल बाजार उधार घटकर 16.09 लाख करोड़ रुपये हो गया है। 16.09 लाख करोड़ रुपये में से, 8.20 लाख करोड़ रुपये (51.0 प्रतिशत) की राशि पहली छमाही में दिनांकित प्रतिभूतियों के निर्गमन के माध्यम से उधार लेने की योजना है, जिसमें 15 हजार करोड़ रुपये के सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड्स (एसजीआरबी) शामिल हैं।
8.20 लाख करोड़ रुपये के सकल बाजार उधार को 26 साप्ताहिक नीलामियों के माध्यम से पूरा किया जाएगा। बाजार उधार 3, 5, 7, 10, 15, 30, 40 और 50 वर्ष की प्रतिभूतियों में वितरित किया जाएगा। विभिन्न परिपक्वता अवधियों के तहत उधार (एसजीआरबी सहित) का हिस्सा इस प्रकार होगा: 3-वर्षीय (8.1 प्रतिशत), 5-वर्षीय (15.4 प्रतिशत), 7-वर्षीय (8.1 प्रतिशत), 10-वर्षीय (29.0 प्रतिशत), 15-वर्षीय (14.5 प्रतिशत), 30-वर्षीय (7.3 प्रतिशत), 40-वर्षीय (8.0 प्रतिशत) और 50-वर्षीय (9.6 प्रतिशत)।
सरकार नीलामी अधिसूचनाओं में उल्लिखित प्रत्येक प्रतिभूति के बदले 2,000 करोड़ रुपये तक की अतिरिक्त सदस्यता बनाए रखने के लिए ग्रीनशू विकल्प का प्रयोग करने का अधिकार सुरक्षित रखेगी।
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (क्यू1) में ट्रेजरी बिल (टी-बिल) जारी करके साप्ताहिक उधार 12 सप्ताहों के लिए 24,000 करोड़ रुपये रहने की उम्मीद है, जिसमें 91-दिवसीय टी-बिल के तहत 12,000 करोड़ रुपये 182-दिवसीय टी-बिल के तहत 6,000 करोड़ रुपये और 364-दिवसीय टी-बिल के तहत 6,000 करोड़ रुपये जारी किए जाएंगे।
सरकारी खातों में अस्थायी विसंगतियों को दूर करने के लिए, आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही के लिए अर्थोपाय अग्रिम-अल्पकालिक ऋण (वेज एंड मीन एडवांसेज) सुविधा की सीमा 2.50 लाख करोड़ रुपये निर्धारित की है।
वित्त मंत्रालय और आरबीआई की वेबसाइटों पर उपलब्ध विस्तृत प्रेस विज्ञप्तियों में इससे संबंधित अधिक जानकारी ली जा सकती है।



