
नवांशहर ज़िले के एक छोटे से औद्योगिक क्षेत्र में इन दिनों कुछ अलग ही चल रहा है। यहाँ सड़कों पर बड़ी-बड़ी मशीनें उतर रही हैं, इंजीनियरों की टीमें काम में जुटी हैं और स्थानीय युवाओं की आँखों में एक नई उम्मीद की किरण जग रही है। वजह है यहाँ की मशहूर जापानी कंपनी टोप्पन फ़िल्म्स का 788 करोड़ रुपये का भारी-भरकम निवेश।
यह कहानी सिर्फ़ एक निवेश की नहीं, बल्कि पंजाब के बदलते औद्योगिक परिदृश्य और सरकार की दूरदर्शी नीतियों की है। टोप्पन फ़िल्म्स जापान की एक विश्व-प्रसिद्ध कंपनी है जो 1900 से भी पहले से काम कर रही है। यह कंपनी खाने-पीने की चीज़ों, दवाओं और इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए ख़ास तरह की पैकेजिंग फ़िल्में बनाती है। इनकी खासियत यह है कि ये फ़िल्में बेहद पतली, मज़बूत और पर्यावरण के अनुकूल होती हैं। टोप्पन की पैकेजिंग का इस्तेमाल दुनिया भर की बड़ी-बड़ी कंपनियाँ करती हैं। चाहे चॉकलेट के रैपर हों, दवाइयों की पट्टियाँ हों या मोबाइल फ़ोन के पुर्जों की पैकेजिंग – टोप्पन की तकनीक हर जगह छाई हुई है। पंजाब सरकार की निवेशक-हितैषी नीतियाँ। सरकार ने विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) बनाए हैं जहाँ कंपनियों को कई तरह की छूट और सुविधाएँ मिलती हैं। टॉपन फिल्म्स नवांशहर में मैक्स स्पेशियलिटी फिल्म्स के साथ साझेदारी में पहले से ही काम कर रही है। अब, इस 788 करोड़ रुपये के निवेश से वहाँ फैक्ट्री का व्यापक विस्तार होगा।
नई फैक्ट्री में अत्याधुनिक जापानी तकनीक से लैस मशीनें लगेंगी। यहाँ हर तरह की स्पेशल पैकेजिंग फ़िल्में बनाई जाएँगी – खाने-पीने की चीज़ों के लिए बैरियर फ़िल्में, दवाओं के लिए फार्मा-ग्रेड पैकेजिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए एंटी-स्टैटिक फ़िल्में। सबसे बड़ी बात यह है कि यहाँ बना सामान न सिर्फ़ भारत में बल्कि विदेशों में भी निर्यात किया जाएगा। ‘मेड इन पंजाब’ की छाप वाली ये पैकेजिंग दुनिया भर में जाएगी। राजीव नवांशहर के रहने वाले हैं। इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद, वह दिल्ली या गुड़गांव जाने की सोच रहे थे। लेकिन अब उन्हें टॉपन की नई फैक्ट्री में, वह भी अपने ही शहर में, अच्छी नौकरी मिल गई है। यह निवेश राजीव जैसे हज़ारों युवाओं के लिए वरदान साबित होगा। इस फैक्ट्री में लगभग 2000-3000 लोगों को सीधे तौर पर रोज़गार मिलेगा। इसमें इंजीनियर, तकनीशियन, ऑपरेटर, क्वालिटी कंट्रोल एक्सपर्ट और मैनेजमेंट से जुड़े लोग शामिल हैं। लेकिन असल बात यह है कि इससे अप्रत्यक्ष रोज़गार और भी ज़्यादा पैदा होगा। परिवहन, लॉजिस्टिक्स, खाने-पीने की दुकानें, मशीन मरम्मत, कच्चे माल की आपूर्ति – इन सभी क्षेत्रों में हज़ारों अतिरिक्त रोज़गार पैदा होंगे।
पंजाब सरकार ने टोप्पन के साथ मिलकर स्थानीय युवाओं के लिए एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम भी शुरू किया है। इसमें जापानी विशेषज्ञ आकर उन्हें आधुनिक पैकेजिंग तकनीक का प्रशिक्षण देंगे। इस निवेश को लाने में पंजाब सरकार की अहम भूमिका रही है। मुख्यमंत्री ने खुद जापानी व्यापारिक प्रतिनिधिमंडलों से मुलाकात की और उनके सामने पंजाब की संभावनाओं को पेश किया। टोप्पन फ़िल्म्स सिर्फ़ मुनाफ़ा कमाने वाली कंपनी नहीं है। यह पर्यावरण के प्रति बेहद ज़िम्मेदार है। इसके नए कारखाने में बनने वाली पैकेजिंग फ़िल्में पर्यावरण के अनुकूल होंगी। यानी इन फ़िल्मों को या तो रिसाइकल किया जा सकेगा या प्राकृतिक रूप से विघटित किया जा सकेगा। प्लास्टिक प्रदूषण भारत में एक बड़ी समस्या है और ऐसी तकनीक इस समस्या को कम करने में मदद करेगी। इस निवेश का एक और बड़ा फ़ायदा तकनीकी ज्ञान का हस्तांतरण है। जापानी विशेषज्ञ यहाँ आकर भारतीय इंजीनियरों और तकनीशियनों को प्रशिक्षित करेंगे। जापान दुनिया में विनिर्माण के क्षेत्र में अग्रणी है। उनकी गुणवत्ता नियंत्रण, उत्पादकता और नवाचार तकनीकें दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं। पंजाब के युवाओं के लिए इन तकनीकों को सीखने का अवसर अमूल्य है। कुछ चुनिंदा कर्मचारियों को जापान में प्रशिक्षण के लिए भी भेजा जाएगा। वहाँ से लौटने के बाद, वे अपने साथियों को प्रशिक्षित करेंगे। इस तरह, धीरे-धीरे पूरे पंजाब में आधुनिक विनिर्माण की संस्कृति विकसित होगी। पंजाब सरकार को उम्मीद है कि टॉपपैन की सफलता को देखते हुए, और भी विदेशी कंपनियाँ पंजाब आएँगी। पैकेजिंग उद्योग के साथ-साथ ऑटोमोबाइल, फार्मा, इलेक्ट्रॉनिक्स और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में भी निवेश आने की संभावना है।



