
दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को एक्साइज पॉलिसी मामले में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के नेशनल कन्वीनर अरविंद केजरीवाल की पिटीशन पर सुनवाई की। इस दौरान खुद केजरीवाल ने दलीलें रखीं। सुनवाई के दौरान केजरीवाल ने कहा कि उन्हें करप्ट साबित करने की कोशिश की गई। ट्रायल कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया। पूरा CBI केस सरकारी गवाहों के बयानों पर आधारित है। ED और CBI ने कई रेड कीं, लेकिन कोई रिकवरी नहीं हुई। केजरीवाल ने कथित शराब घोटाले में जज के ट्रांसफर की मांग को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में अर्जी दी है। उन्होंने जस्टिस स्वर्णकांत शर्मा के सामने बगावत की पिटीशन दी थी।
कोर्ट में अपना केस पेश करते हुए केजरीवाल ने कहा कि उन पर मनी लॉन्ड्रिंग करने का आरोप है। एक पैराग्राफ में तो लगभग यह कहा गया था कि ये सभी लोग करप्ट हैं। ऐसा लग रहा था जैसे उन्हें सिर्फ करप्ट ही नहीं, बल्कि बहुत करप्ट घोषित कर दिया गया हो। मनीष सिसोदिया केस में सिर्फ तीन हियरिंग हुईं और यह मान लिया गया कि मनीष करप्ट हैं। सुप्रीम कोर्ट ने उस फैसले को पलट दिया। इस केस में सिर्फ तीन हियरिंग हुईं। कोई चार्जशीट नहीं हुई, कोई प्रेयर नहीं हुई। आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने केस खारिज कर दिया। तुषार मेहता ने जवाब दिया कि खारिज नहीं हुआ।
केजरीवाल ने कहा कि जिस तरह ED और CBI ने अप्रूवल डील की, वे बाद में गिरफ्तार करेंगे। FIR एक सौदा था और फिर वे वापस ले लेंगे। आपके नतीजे भी वहीं हैं। मुझे लगभग दोषी और भ्रष्ट घोषित कर दिया गया था। कोर्ट ने कहा कि “मैं इस पर कोई कमेंट नहीं करना चाहता।” केजरीवाल ने कहा कि इस पॉइंट पर निचली अदालत के आदेश बिल्कुल उलटे हैं। नतीजा यह है कि कोई अपराध नहीं किया गया, कोई रिश्वत नहीं ली गई, अपराध की कोई कमाई नहीं ली गई और कोई पैसा गोवा नहीं ले जाया गया।
अरविंद केजरीवाल ने आगे कहा कि मनीष सिसोदिया को ऑर्डर रद्द करके बेल दी गई थी। ऐसे कई ऑर्डर रद्द किए जा चुके हैं। तो क्या अब कोर्ट अपनी पिछली कार्रवाई रद्द कर पाएगा? केजरीवाल ने कहा कि पूरा CBI केस अप्रूवल स्टेटमेंट पर निर्भर करता है। अगर आप गवाह के बयान पर सवालिया निशान लगाते हैं, तो आपने लगभग पूरे ट्रायल कोर्ट के ऑर्डर को रद्द कर दिया है।
केजरीवाल ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने कहा कि गवाहों के बयान पूरी तरह से भरोसेमंद नहीं हैं। CBI का काम पहले से बनी-बनाई कहानी को पूरा करना है। अब मनीष सिसोदिया के केस पर आते हैं। PMLA केस उनका था। केजरीवाल ने कहा कि उन पर मनी लॉन्ड्रिंग करने का आरोप है। एक पैराग्राफ में तो लगभग यह कह दिया गया कि ये सभी लोग करप्ट हैं।
केजरीवाल ने कहा कि 9 मार्च के ऑर्डर ने ED के खिलाफ ट्रायल कोर्ट की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। यह एक क्रिमिनल रिवीजन पिटीशन थी। ED का इससे कोई लेना-देना नहीं था। इस बारे में कोई लिखी हुई अर्जी नहीं थी। मेहता ने सिर्फ ओरल रिक्वेस्ट की थी और वह CBI के वकील थे, ED के वकील नहीं। उनकी ओरल रिक्वेस्ट के आधार पर ऑर्डर पास कर दिया गया। किसी की नहीं सुनी गई। दो दिन बाद ED ने एक और पिटीशन फाइल की, लेकिन कोर्ट ED के प्रति बहुत नरम था। केजरीवाल ने कहा, “आज भी, मैं ED केस में एक आरोपी के तौर पर खड़ा हूं।”



