पंजाब सरकार के जनहित में कड़े फैसले, मरीज़ों के अधिकारों की होगी पुख्ता सुरक्षा
पंजाब सरकार ने पंजाब के निजी अस्पतालों के लिए कुछ सख्त और जनहितकारी दिशानिर्देश जारी किए हैं। ये निर्णय मरीजों के अधिकारों को मजबूती देने और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में मानवीय प्रथाओं को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिए गए हैं।

पंजाब सरकार ने पंजाब के निजी अस्पतालों के लिए कुछ सख्त और जनहितकारी दिशानिर्देश जारी किए हैं। ये निर्णय मरीजों के अधिकारों को मजबूती देने और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में मानवीय प्रथाओं को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आदेशों के अनुसार, सभी निजी अस्पतालों में मुर्दाघर (मॉर्चुअरी) की सुविधा अनिवार्य कर दी गई है ताकि शवों को सुरक्षित और सम्मानजनक तरीके से रखा जा सके। यह कदम उन घटनाओं को रोकने के लिए उठाया गया है जहां परिवारों को अपने प्रियजनों के शव को लेकर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। सबसे महत्वपूर्ण निर्णय यह है कि अस्पतालों को मृतक का शव परिवार को सौंपना होगा, भले ही बकाया बिल का भुगतान न किया गया हो। यह नियम शोक की घड़ी में परिवारों को किसी भी प्रकार के उत्पीड़न से बचाने के लिए बनाया गया है। पंजाब सरकार का यह फैसला उन मामलों को ध्यान में रखकर लिया गया है जहां कुछ निजी चिकित्सा संस्थानों द्वारा कथित शोषण की शिकायतें मिली थीं, खासकर मरीज की मृत्यु जैसी संवेदनशील स्थितियों में। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ये बदलाव मान सरकार की व्यापक प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं कि पंजाब की स्वास्थ्य प्रणाली को अधिक जन-केंद्रित बनाया जाए। सभी निजी अस्पतालों में इन निर्देशों को प्रदर्शित करने वाले स्पष्ट नोटिस बोर्ड लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। यह कदम जनता में जागरूकता बढ़ाने और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। इन बोर्डों पर मरीजों और उनके परिवारों के अधिकारों की जानकारी स्पष्ट रूप से लिखी होगी, जिससे वे अपने अधिकारों को जान सकें और किसी भी प्रकार के अनुचित व्यवहार के खिलाफ आवाज उठा सकें। स्वास्थ्य विभाग ने निजी अस्पतालों को निर्देश दिया है कि वे इन बोर्डों को अस्पताल के मुख्य स्थानों पर प्रमुखता से लगाएं ताकि हर व्यक्ति इन्हें आसानी से देख और पढ़ सके। लावारिस शवों के लिए, जिला प्रशासन अंतिम संस्कार करने की पूर्ण जिम्मेदारी लेगा। यह प्रावधान उन दुखद मामलों के लिए है जहां मृतक के कोई परिजन नहीं होते या उनकी पहचान नहीं हो पाती। सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि ऐसे मामलों में भी मृतक को सम्मानजनक विदाई मिले और उनका अंतिम संस्कार विधिवत तरीके से किया जाए। जिला प्रशासन को इस संबंध में एक स्पष्ट प्रक्रिया तैयार करने का निर्देश दिया गया है जिसमें स्थानीय प्रशासन, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मिलकर काम करेंगे। यह पहल मानवीय मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी को प्रदर्शित करती है।



