
पंजाब सरकार ने पंजाब में पर्यावरण संरक्षण को अपने शासन का एक मुख्य मिशन बना दिया है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पिछले दो वर्षों में राज्य में हरियाली की दिशा में ऐतिहासिक काम हुआ है। यह अभियान सिर्फ सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक जन आंदोलन का रूप ले चुका है। गांवों, स्कूलों, धार्मिक स्थलों और शहरी इलाकों में यह हरियाली मुहिम अब जनता की भागीदारी से “हर घर बागीचा” जैसी भावना को साकार कर रही है। पंजाब के लिए यह पहल इसलिए भी जरूरी थी क्योंकि पिछले दो दशकों में राज्य का वन क्षेत्र लगातार घटता गया। उन्होंने “ग्रीनिंग पंजाब मिशन” जैसे अभियानों को सिर्फ कागज़ों तक सीमित रखा और धरातल पर नतीजे शून्य रहे। इसी दौरान पेड़ों की अंधाधुंध कटाई ने पंजाब की सांसें और कमजोर कर दीं। पेड़ काटे गए, विकास परियोजनाओं के नाम पर। इन ठोस प्रयासों का असर अब साफ दिखाई दे रहा है। भारत सरकार की फॉरेस्ट सर्वे रिपोर्ट 2023 के अनुसार, पंजाब में ट्री कवर में 177.22 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि हुई है — जो पिछले पंद्रह वर्षों में सबसे बड़ी बढ़ोतरी है। यह केवल आंकड़ा नहीं, बल्कि यह दर्शाता है कि भगवंत मान सरकार के नेतृत्व में हर नागरिक पर्यावरण संरक्षण का हिस्सा बन रहा है। अब पंजाब एक ऐसी दिशा में बढ़ रहा है जहां विकास और पर्यावरण साथ-साथ चल रहे हैं। पंजाब सरकार ने इस अभियान को धार्मिक और सांस्कृतिक भावना से भी जोड़ा है। गुरबाणी की शिक्षाओं “पवन गुरु, पानी पिता, माता धरत महत” से प्रेरित होकर राज्य में ‘नानक बागीची’ और ‘पवित्र वन’ जैसी योजनाएं शुरू की गईं। अब तक 105 नानक बागीचियाँ और 268 पवित्र वन स्थापित किए जा चुके हैं। ये छोटे-छोटे हरित स्थल न सिर्फ ऑक्सीजन बढ़ा रहे हैं, बल्कि शहरी इलाकों के “ग्रीन लंग्स” भी बन रहे हैं। इसके साथ ही “पंजाब हरियाली लहर” के तहत ट्यूबवेलों के पास पौधे लगाए जा चुके हैं, जिससे किसान भी इस हरियाली मिशन के साझेदार बने हैं। पंजाब सरकार ने पर्यावरण को लेकर वैश्विक स्तर पर भी कदम बढ़ाया है। जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी के साथ परियोजना शुरू की गई है, जिसके तहत पंजाब का वन क्षेत्र 7.5% करने का लक्ष्य रखा गया है। यह परियोजना 2025-26 से अगले पाँच वर्षों में लागू होगी और इससे न केवल हरियाली बढ़ेगी, बल्कि हजारों युवाओं को रोजगार भी मिलेगा। इन पहलों ने पंजाब को पूरे देश में पर्यावरण संरक्षण का अग्रणी राज्य बना दिया है।



