खबरदेशराजनीति

सरकार ने 2024-25 में उर्वरकों पर 1.77 लाख करोड़ रुपये से अधिक की दी सब्सिडी

रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के उर्वरक विभाग ने आज प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) प्रणाली के सफल कार्यान्वयन एवं कृषि इनपुट को किफायती बनाने के लिए सरकार की निरंतर वित्तीय प्रतिबद्धता की रूपरेखा प्रस्तुत की। सरकार ने 2024-25 वित्तीय वर्ष में यह सुनिश्चित करते हुए कि सभी किसानों को रियायती दरों पर बिना किसी व्यव्धान के के पोषक तत्व उपलब्ध हों, उर्वरक सब्सिडी के लिए 1,77,129.50 करोड़ रुपये आवंटित एवं उपयोग किए। यह 2023-24 में 1,95,420.51 करोड़ रुपये और 2022-23 में 2,54,798.93 करोड़ रुपये के व्यय के बाद किया गया है जो सब्सिडी खर्च को रणनीतिक रूप से सुव्यवस्थित करने के साथ-साथ पूर्ण आपूर्ति सुरक्षा की निरंतरता को दर्शाता है।

सरकार पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (एनबीएस) योजना के माध्यम से मृदा पोषक तत्वों के असंतुलन को दूर करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। पोषक तत्वों (नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटेशियम और सल्फर) की मात्रा के आधार पर निश्चित सब्सिडी प्रदान करके, यह नीति जटिल एनपीके ग्रेड और जस्ता एवं बोरॉन जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों से युक्त मजबूत उर्वरकों के उपयोग को प्रोत्साहित करती है।

किसानों को सब्सिडी वाले उर्वरक की बिक्री खुदरा विक्रेताओं के स्तर पर स्थापित प्वाइंट ऑफ सेल (पीओएस) डिवाइस के माध्यम से आधार आधारित प्रमाणीकरण द्वारा की जाती है। वर्तमान में, प्रति खरीदार प्रति माह 50 बोरी की सीमा निर्धारित है यानी प्रति खरीदार प्रति मौसम कुल 300 बोरी। पीओएस एप्लिकेशन को अपग्रेड किया गया है ताकि खरीदार द्वारा मासिक एवं मौसमी सीमा के मुकाबले खरीदी गई पिछली मात्रा प्रदर्शित की जा सके, जिससे खरीदार के लिए पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।

इसके अलावा, जमाखोरी, हेराफेरी एवं कालाबाजारी से निपटने के लिए, उर्वरकों को आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के अंतर्गत आवश्यक वस्तु घोषित किया गया है और उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 के तहत अधिसूचित किया गया है। राज्य सरकारों को उक्त कदाचार में शामिल लोगों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई करने का अधिकार प्राप्त है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button