युवा राष्ट्र निर्माता और संवैधानिक भविष्य के संरक्षक बनेंगे: चीफ जस्टिस सूर्यकांत
भारत के चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत राजीव गांधी नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ़ लॉ के 7वें कॉन्वोकेशन में चीफ़ गेस्ट थे। उन्होंने स्टूडेंट्स से संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखने और समाज की सेवा में खुद को समर्पित करने की अपील की।

भारत के चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत राजीव गांधी नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ़ लॉ के 7वें कॉन्वोकेशन में चीफ़ गेस्ट थे। उन्होंने स्टूडेंट्स से संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखने और समाज की सेवा में खुद को समर्पित करने की अपील की।
जस्टिस सूर्यकांत ने ग्रेजुएट हो रहे स्टूडेंट्स से कहा कि वे देश बनाने वाले और भारत के संवैधानिक भविष्य के रखवाले के तौर पर अपनी भूमिका निभाएं।
स्टूडेंट्स को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि हर पीढ़ी को रिपब्लिक अधूरा विरासत में मिलता है और वह इसके भविष्य को बनाने की ज़िम्मेदारी लेती है।
उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि संविधान की असली ताकत सिर्फ़ ज्यूडिशियल इंटरप्रिटेशन या इंस्टीट्यूशनल फ्रेमवर्क में नहीं, बल्कि वकीलों के काम और वैल्यूज़ में है।
उन्होंने ‘केस बनाने वालों’ और ‘देश बनाने वालों’ में फ़र्क बताया। उन्होंने लीगल प्रोफ़ेशन को सिर्फ़ केस जीतने या प्रोसेस की जानकारी पर ध्यान देने के खिलाफ़ चेतावनी दी।
उन्होंने प्रोफ़ेशनल काबिलियत की अहमियत को माना। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि वकीलों को न्याय, निष्पक्षता और लीगल सिस्टम में लोगों के भरोसे पर अपने कामों के लंबे समय के असर पर भी सोचना चाहिए।



