खबरदेश

भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय ने अनुसंधान और विकास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने के लिए भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए

भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय ने 6 मई, 2026 को नई दिल्ली के कर्तव्य भवन में भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ (एफआईसीसीआई) के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए

भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय ने 6 मई, 2026 को नई दिल्ली के कर्तव्य भवन में भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ (एफआईसीसीआई) के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इस साझेदारी का उद्देश्य उद्योग, शिक्षा जगत और अनुसंधान संस्थानों के बीच की खाई को पाटकर अनुसंधान और विकास के लिए एक सशक्त इकोसिस्टम को बढ़ावा देना; अनुसंधान, उसके व्यावहारिक अनुप्रयोग और व्यावसायीकरण को प्रोत्साहित करना; रणनीतिक साझेदारियों को बढ़ावा देना और नीतिगत संवाद को समर्थन देना है।

एफआईसीआई के उपाध्यक्ष और डालमिया भारत समूह के प्रबंध निदेशक श्री पुनीत डालमिया ने अपने आरंभिक संबोधन में इस बात पर बल दिया कि यह समझौता ज्ञापन किस प्रकार एक सोच में बदलाव लाएगा, जिसका मुख्य उद्देश्य अकादमिक जगत से अनुप्रयोगों की ओर, अलग-थलग प्रक्रियाओं से प्रणालियों की ओर और व्यावहारिक दृष्टिकोण से परिवर्तनकारी दृष्टिकोण की ओर बढ़ना है; जिससे विभिन्न क्षेत्रों में अभूतपूर्व प्रगति होगी। उन्होंने कहा कि भारत को वैश्विक स्तर पर समाधानों का सह-निर्माता बनना चाहिए, जो परिणाम के अनुकूल हों और जिनका प्रभाव मापने योग्य हो।

सार्वजनिक अनुसंधान प्राधिकरण कार्यालय की वैज्ञानिक सचिव डॉ (श्रीमती) परविंदर मैनी ने अपने संबोधन में अनुसंधान एवं विकास इकोसिस्टम को बनाए रखने के लिए सरकार और सार्वजनिक अनुसंधान प्राधिकरण कार्यालय के निरंतर प्रयासों के बारे में बताया, जो अनुसंधान एवं विकास (आर एंड डी) इकोसिस्टम को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे हैं। ये प्रयास अनुसंधान एवं विकास में उद्योगों के योगदान को बढ़ाने में सहायक होंगे। इन प्रयासों का प्रभाव अंततः अनुसंधान एवं विकास पर सकल व्यय (जीईआरडी) में दिखेगा।

इसके बाद संगम फाउंडेशन के निदेशक श्री शौर्य डोवाल ने अपने विचार व्यक्त करते हुए अनुसंधान एवं विकास में अंतरराष्ट्रीय भागीदारी की आवश्यकता और ऊर्जा निर्भरता जैसे क्षेत्रों में स्वदेशी उत्पादों और सेवाओं की विस्तारशीलता और सुगमता को मजबूत करने पर बल दिया।

भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर अजय कुमार सूद ने अपने संबोधन में विभिन्न क्षेत्रों में नए विचारों, उत्पादों या प्रक्रियाओं को विकसित करने के लिए प्रौद्योगिकी प्रसार की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा और हरित बैटरी जैसे उच्च तकनीक वाले प्राथमिकता क्षेत्रों को भी बड़े पैमाने पर विकसित करने की आवश्यकता है। प्रोफेसर सूद ने कहा कि चूंकि सरकार द्वारा समर्थित अनुसंधान एवं विकास निधि उद्योगों और स्टार्टअप्स को सहायता प्रदान करती है, इसलिए उद्योगों के लिए गहन तकनीकी अनुसंधान एवं विकास करने का यह एक अनूठा अवसर है। उन्होंने कहा कि पीएसए कार्यालय और एफआईसीआई के बीच यह समझौता ज्ञापन संरचित जुड़ाव लाएगा, जिससे उद्योग-अकादमिक संबंध स्थापित होंगे और भारत के अनुसंधान एवं विकास इकोसिस्टम के सभी हितधारकों को ठोस परिणाम प्राप्त करने के लिए जोड़ा जा सकेगा।

एफआईसीआई के महासचिव श्री अनंत स्वरूप ने अपने समापन भाषण में व्यावसायीकरण और विस्तारशीलता की चुनौतियों से निपटने और संगठनों की चपलता पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही। डीसीएम श्रीराम के वरिष्ठ प्रबंध निदेशक श्री आलोक श्रीराम और एब्सोल्यूट के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री अगम खरे ने ऊर्जा समाधान, फार्मा क्षेत्र और कृषि जैव प्रौद्योगिकी सहित विभिन्न क्षेत्रों में औद्योगिक अनुसंधान एवं विकास के प्रति प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला।

इसके बाद समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए और उसका आदान-प्रदान किया गया, जो अनुसंधान एवं विकास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने के उद्देश्य से किए जाने वाले सहयोग का संकेत देता है। इस पर पीएसए कार्यालय की ओर से वैज्ञानिक-जी/सलाहकार डॉ. प्रीति बंजल और एफआईसीआई की ओर से उप महासचिव श्री सुमीत गुप्ता ने हस्ताक्षर किए।

इस समारोह में डालमिया भारत समूह के श्री अनूप ए.एन., निदेशक एवं अनुसंधान एवं विकास एवं नवाचार एवं स्टार्टअप प्रमुख डॉ. बरदा प्रसाद, उप निदेशक श्री अमित मिश्रा, एफआईसीआई की वरिष्ठ सहायक निदेशक सुश्री दिव्या छाबडा और ओपीएसए की ओएसडी डॉ. दिव्या वशिष्ठ भी उपस्थित थे।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button