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केन्द्रीय मंत्री अमित शाह ने त्रिपुरा में BSF की लंकामूरा सीमा चौकी का निरीक्षण किया, सीमा प्रहरियों से संवाद कर बढ़ाया जवानों का हौसला

असीम धैर्य, अटूट परिश्रम और माँ भारती के प्रति अनन्य भक्ति के प्रतीक परम पूज्य 'गुरुजी' को पुण्यतिथि पर नमन, RSS को आकार देने वाले गुरुजी आज भी राष्ट्रप्रथम के प्रेरणास्रोत

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज सीमा सुरक्षा बल (BSF) की लंकामूरा सीमा चौकी (BOP) का निरीक्षण किया और BSF के जवानों के साथ संवाद किया। केन्द्रीय गृह मंत्री ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में वृक्षारोपण अभियान के अंतर्गत अगर पौधे का रोपण किया। इस अवसर पर त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा, केन्द्रीय गृह सचिव, निदेशक, आसूचना ब्यूरो, सचिव, सीमा प्रबंधन और महानिदेशक, सीमा सुरक्षा बल सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

इस अवसर पर अपने संबोधन में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि आज वृक्षारोपण का कार्यक्रम भी यहां हुआ है। 2019 से लेकर आज तक हमारे सभी केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) के जवानों ने लगभग 7.5 करोड़ से अधिक वृक्ष लगाने का काम किया है। इस वर्ष 40 लाख से 60 लाख वृक्ष लगाएंगे और लगाए हुए वृक्षों में से जो वृक्ष जीवित नहीं रह सके, उन सभी वृक्षों को दोबारा लगाने का काम किया जाएगा। अगले वर्ष CAPFs के जवान 2 करोड़ वृक्ष लगाने का काम करेंगे, जिससे पर्यावरण और देश की सेवा होगी।

श्री अमित शाह ने आज विश्व पर्यावरण दिवस पर पर्यावरण संरक्षण के महत्त्व और उस दिशा में मोदी सरकार के कार्यों पर भी प्रकाश डाला। श्री शाह ने कहा कि ओजोन की परत ही सूर्य की किरणों को मानव और अन्य जीवों के लायक बनाती है। उन्होंने कहा कि इसे बचाने का एकमात्र उपाय वृक्षों की संख्या को बढ़ाना है।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने पर्यावरण संरक्षण के लिए कई प्रकार के कदम एक साथ उठाए हैं। इस दिशा में एक प्रकार से भारत का मॉडल पेरिस सम्मेलन में आदर्श मॉडल के रूप में स्वीकारा गया। उन्होंने कहा कि हमने पेरिस घोषणा के हर बिंदु को समयपूर्व पूरा कर ऋग्वेद के पर्यावरण की रक्षा के संदेश के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को विश्व के सामने साबित किया है। उन्होंने कहा कि CAPFs के सभी जवान बड़े मनोयोग के साथ एक वृक्ष को अपना परिजन मानकर इसकी देखभाल कर रहे हैं। यह सरकारी आदेशों से प्रेरित कार्यक्रम नहीं होना चाहिए, बल्कि सहज आदत होनी चाहिए, क्योंकि यही आदत हमें बचा सकती है।

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