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भारत के लिए अंतरिक्ष और जैवप्रौद्योगिकी क्षेत्रों में नए सहयोग के अवसर: डॉ. जितेंद्र सिंह

भारत के लिए अंतरिक्ष और जैवप्रौद्योगिकी क्षेत्रों में नए सहयोग के अवसर: डॉ. जितेंद्र सिंह

ब्रिक्स चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (ब्रिक्स सीसीआई) के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, भूमि विज्ञान के स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री; प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन; परमाणु ऊर्जा विभाग और अंतरिक्ष विभाग के राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह से भेंट की और नवाचार, स्टार्टअप, उभरती प्रौद्योगिकियाँ, शोध सहयोग तथा उद्यमशीलता के माध्यम से ब्रिक्स तथा ब्रिक्स प्लस पारिस्थितिकी तंत्र में उद्योग जनित वैश्विक जुड़ाव और सहयोग को सुदृढ़ करने के तरीकों पर चर्चा की।

प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व ब्रिक्स सीसीआई के चेयरमैन श्री समीप शास्त्री ने किया और इसमें उपाध्यक्ष श्री अतुल बंसल, उप-अध्यक्ष श्रीमती शबाना नसीम तथा चैम्बर के अन्य पदाधिकारी शामिल थे। प्रतिनिधियों ने मंत्री को पिछले दशक में चैम्बर द्वारा व्यापार सुगमता, व्यवसाय-से-व्यवसाय संलग्नता, महिला उद्यमशीलता, स्टार्टअप नेटवर्किंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, शोध भागीदारी और ब्रिक्स व ब्रिक्स प्लस देशों के बीच क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए किए गए प्रयासों से अवगत कराया।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत की वैश्विक नवाचार केंद्र के रूप में बढ़ती प्रतिष्ठा और उभरती प्रौद्योगिकियों में उसकी नेतृत्व क्षमता उद्योग संगठनों के लिए ऐसे अंतरराष्ट्रीय साझेदारी निर्माण का आदर्श अवसर प्रस्तुत करती है जो राष्ट्रीय विकास और वैश्विक विकास दोनों में योगदान देगी। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स कार्यक्षेत्र में काम करने वाले संस्थानों को पारंपरिक नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म तक सीमित रहने के बजाय ज्ञान, नवाचार और सार्थक भागीदारी के माध्यम से एक विशिष्ट मूल्य प्रस्ताव बनाना चाहिए।

भारत के विस्तारशील नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र का उल्लेख करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि देश ने अंतरिक्ष, जैवप्रौद्योगिकी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, परमाणु ऊर्जा और गहरी प्रौद्योगिकियों (डीप टेक) जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति देखी है, जिससे वैश्विक सहयोग के नए द्वार खुले हैं। उन्होंने कहा कि पिछले दशक में किए गए सुधारों ने इन क्षेत्रों को आर्थिक विकास और उद्यमशीलता के इंजन में परिवर्तित कर दिया है, जो सरकार, उद्योग, अकादमी और नवप्रवर्तकों के बीच साझेदारी के लिए महत्वपूर्ण अवसर उत्पन्न कर रहे हैं।

मंत्री ने कहा कि ब्रिक्स सीसीआई जैसे उद्योग मंच भारतीय स्टार्टअप और ब्रिक्स व ब्रिक्स प्लस देशों के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र के बीच सहयोग को सुविधाजनक बना सकते हैं और प्रौद्योगिकी-आधारित आर्थिक जुड़ाव को बढ़ावा दे सकते हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने चैम्बर को क्षेत्र-विशिष्ट बैठकों, नवाचार मंचों और विषयवार संलग्नताओं के माध्यम से अपने जुड़ाव को गहरा करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि निरंतर दृश्यता, सार्थक भागीदारी और ज्ञान-आधारित योगदान चैम्बर की भूमिका को व्यापक ब्रिक्स पारिस्थितिकी तंत्र के साथ भारत की भागीदारी को आगे बढ़ाने में और मजबूत करेंगे।

मंत्री ने चैम्बर को भारत की वैज्ञानिक और तकनीकी प्राथमिकताओं के अनुरूप सहयोग के फोकस्ड क्षेत्र पहचानने और संबंधित विभागों व संस्थानों के साथ उत्पादक संलग्नता को सक्षम करने वाले क्षेत्र-विशिष्ट प्रस्ताव विकसित करने का निमंत्रण भी दिया। उन्होंने कहा कि स्टार्टअप, जैवप्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र और सार्वजनिक-निजी सहभागिता जैसे क्षेत्रों में परस्पर लाभकारी सहयोग की भारी संभावनाएँ निहित हैं।

ब्रिक्स चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने ब्रिक्स और ब्रिक्स प्लस पारिस्थितिकी तंत्र में उद्यमशीलता, नवाचार, व्यापार सुगमता, महिला-नेतृत्व वाले उद्यम, शोध सहयोग और व्यवसायिक नेटवर्किंग को बढ़ावा देने के अपने निवर्तमान उपायों का परिचय दिया।

एक दशक से अधिक पहले स्थापित यह चैम्बर अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंचों, क्षेत्रीय संवादों और सदस्य तथा भागीदार देशों के उद्यमों, संस्थाओं और हितधारकों को सम्मिलित करने वाले सहयोगी प्लेटफार्मों के माध्यम से अपनी पहुँच का काफी विस्तार कर चुका है।

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