केन्द्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम ने जनजातीय कला, संस्कृति एवं पारंपरिक ज्ञान से संबंधित एक डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म ‘ट्राइबएक्स’ का शुभारंभ किया
केन्द्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम ने जनजातीय कला, संस्कृति एवं पारंपरिक ज्ञान से संबंधित एक डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म ‘ट्राइबएक्स’ का शुभारंभ किया

जनजातीय शिक्षा को डिजिटल रूप देने और भारत की समृद्ध पारंपरिक विरासत को संरक्षित करने की एक अहम पहल के तहत, जनजातीय कार्य मंत्रालय ने आज ‘ट्राइबएक्स’ का शुभारंभ किया। जनजातीय कला, संस्कृति, पारंपरिक ज्ञान और कौशल विकास के प्रति समर्पित यह अपनी तरह का पहला डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म है। इस प्लेटफॉर्म का शुंभारंभ जनजातीय कार्य मंत्री श्री जुएल ओराम ने ओडिशा के भुवनेश्वर में ‘जनजातीय अनुसंधान संस्थानों (टीआरआई) को सशक्त बनाने’ के बारे में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला के दौरान किया।
इस विमोचन समारोह में माननीय केन्द्रीय जनजातीय कार्य राज्यमंत्री श्री दुर्गादास उइके; नीति आयोग के माननीय सदस्य डॉ. आर. बालासुब्रमण्यम; ओडिशा सरकार में अनुसूचित जनजाति एवं अनुसूचित जाति विकास, अल्पसंख्यक और पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री माननीय श्री नित्यानंद गोंड; जनजातीय कार्य मंत्रालय की सचिव श्रीमती रंजना चोपड़ा; ओडिशा सरकार के अनुसूचित जनजाति एवं अनुसूचित जाति विकास, अल्पसंख्यक और पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के कमिश्नर-सह-सचिव श्री बी. परमेश्वरन; और जनजातीय कार्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री अनंत प्रकाश पांडे के साथ-साथ मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, देश भर के जनजातीय अनुसंधान संस्थानों (टीआरआई) के निदेशक, शिक्षाविद, जनजातीय ज्ञान विशेषज्ञ, कारीगर और अन्य गणमान्य प्रतिभागी शामिल हुए।
सभा को संबोधित करते हुए, श्री जुएल ओराम ने कहा कि ‘ट्राइबएक्स’ माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसका उद्देश्य भारत की समृद्ध जनजातीय विरासत को संरक्षित एवं प्रोत्साहित तथा उसे वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करने के साथ-साथ जनजातीय समुदाय के वास्तविक ज्ञान को हर जगह सीखने वालों तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक में भौगोलिक बाधाओं को दूर करने, जनजातीय समुदायों को सशक्त बनाने और यह सुनिश्चित करने की क्षमता है कि सदियों पुरानी ज्ञान प्रणालियां आधुनिक दुनिया में भी फलती-फूलती रहें। उन्होंने सभी राज्यों और केन्द्र-शासित प्रदेशों के जनजातीय अनुसंधान संस्थानों (टीआरआई) और जनजातीय कल्याण विभागों (टीडब्ल्यूडी) से यह भी आग्रह किया कि वे विश्वविद्यालयों, उच्च शिक्षण संस्थानों, शिक्षकों और विद्यार्थियों के बीच इस प्लेटफॉर्म के बारे में व्यापक जागरूकता फैलाएं और उन्हें ‘ट्राइबएक्स’ के माध्यम से उपलब्ध कराए जाने वाले पाठ्यक्रमों में सक्रिय रूप से नामांकित होने और उनका लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित करें।
एक व्यापक डिजिटल लर्निंग इकोसिस्टम के तौर पर तैयार, ‘ट्राइबएक्स’ जनजातीय भाषाओं, कलाओं, शिल्प और पारंपरिक ज्ञान में मुफ्त सर्टिफिकेट कोर्स और यूजीसी-मान्यता प्राप्त पोस्ट-ग्रेजुएट डिप्लोमा कार्यक्रम के जरिए सीखने के व्यवस्थित अवसर प्रदान करता है। यह प्लेटफॉर्म दुनिया भर के सीखने वालों, शोधकर्ताओं, शिक्षकों एवं उत्साही लोगों को जनजातीय ज्ञान के विशेषज्ञों तथा कुशल कारीगरों से सीधे सीखने व भारत की विविध जनजातीय परंपराओं की सही जानकारी हासिल करने का अवसर देता है। शिक्षा के अलावा, ‘ट्राइबएक्स’ जनजातीय भाषाओं, मौखिक परंपराओं, प्रदर्शन कलाओं, सांस्कृतिक रीति-रिवाजों और पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को आने वाली पीढ़ियों के लिए दर्ज करने, संरक्षित करने और बढ़ावा देने के लिए एक डिजिटल भंडार के तौर पर भी काम करता है।
यह प्लेटफॉर्म अभी चित्रकला, हस्तशिल्प, हथकरघा, कलाकृतियां और पारंपरिक वाद्ययंत्र सहित जनजातीय कला के विभिन्न रूपों पर आधारित 20 मुफ्त सर्टिफिकेट कोर्स उपलब्ध कराएगा, और इसे 100 से अधिक मुफ्त सर्टिफिकेट कोर्स तक बढ़ाने की योजना है।



