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भारत टेक्स 2026 के तीसरे दिन सस्टेनेबल टेक्सटाइल्स, सर्कुलैरिटी, भविष्य के लिए तैयार कौशल और ग्लोबल ट्रेड को मिला बढ़ावा

भारत टेक्स 2026 के तीसरे दिन सस्टेनेबल टेक्सटाइल्स, सर्कुलैरिटी, भविष्य के लिए तैयार कौशल और ग्लोबल ट्रेड को मिला बढ़ावा

भारत टेक्स 2026 के तीसरे दिन सर्कुलैरिटी, रिस्पॉन्सिबल सोर्सिंग, टेक्सटाइल फाइनेंसिंग, भविष्य के लिए तैयार कौशल (फ्यूचर-रेडी स्किल्स), ग्लोबल ट्रेड और टेक्नोलॉजी आधारित विकास पर केंद्रित चर्चाओं के लिए पॉलिसी मेकर्स, राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों, उद्योग जगत के अग्रणी प्रतिनिधियों, निवेशकों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों, ब्रांड्स, शैक्षणिक संस्थानों तथा सस्टेनेबिलिटी विशेषज्ञों ने एक मंच पर सहभागिता की। पैनल डिस्कशंस, राउंडटेबल्स, वर्कशॉप्स, मास्टरक्लासेस और इंडस्ट्री इंटरैक्शंस की श्रृंखला के माध्यम से प्रतिस्पर्धी, समावेशी और पर्यावरणीय दृष्टि से उत्तरदायी टेक्सटाइल सेक्टर के निर्माण के लिए व्यावहारिक उपायों पर प्रकाश डाला गया।

दिन का एक प्रमुख आकर्षण मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सहभागिता रही। उन्होंने मध्य प्रदेश स्टेट पैवेलियन का दौरा किया और राज्य की टेक्सटाइल विरासत, मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं तथा निवेश की संभावनाओं का प्रदर्शन कर रहे प्रतिनिधियों से संवाद किया।

इसके उपरांत डॉ. मोहन यादव ने मध्य प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित मध्य प्रदेश स्टेट सेशन में भाग लिया। इस सत्र में टेक्सटाइल वैल्यू चेन के विभिन्न आयामों में राज्य की क्षमताओं तथा निवेश आकर्षित करने, विनिर्माण का विस्तार करने, रोजगार सृजन को बढ़ावा देने और उद्योग-आधारित विकास को गति देने की संभावनाओं को रेखांकित किया गया।

सत्र के उपरांत एक मीडिया इंटरेक्शन भी आयोजित किया गया, जिसमें डॉ. मोहन यादव ने राज्य के टेक्सटाइल सेक्टर की संभावनाओं तथा उपलब्ध निवेश अवसरों पर प्रकाश डाला।

दिनभर चली चर्चाओं में इंडस्ट्री, इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशंस और सस्टेनेबिलिटी संस्थानों के प्रमुख विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (निफ्ट) के नेतृत्व में आयोजित “इंडियन ट्रेंड्स टू ग्लोबल टेस्ट: फोरकास्टिंग फॉर बिलियन कंज्यूमर्स (विजननेक्स्ट)” विषयक चर्चा में जयपुर रग्स कंपनी प्राइवेट लिमिटेड के अध्यक्ष श्री नंद किशोर चौधरी तथा इटली स्थित रिकार्डो रामी स्टूडियो के संस्थापक श्री रिकार्डो रामी ने भाग लिया। इस चर्चा में उपभोक्ताओं की प्राथमिकताओं (कंज्यूमर इनसाइट्स), स्वदेशी ज्ञान (इंडिजिनस नॉलेज) और समकालीन डिजाइन (कॉन्टेम्परेरी डिजाइन) के समन्वय के माध्यम से वैश्विक फैशन ट्रेंड्स को दिशा देने की भारत की क्षमता को रेखांकित किया गया।

 

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