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डाक विभाग ने प्रसिद्ध कलाकार श्रीयुत सतीश गुजराल के शताब्दी वर्ष पर स्मारक डाक टिकट जारी किया

डाक टिकट हमारे देश की आत्मा को समेटे रहते हैं और पीढ़ियों तक भारत की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करते हैंडाक टिकट हमारे देश की आत्मा को समेटे रहते हैं और पीढ़ियों तक भारत की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करते हैं: केंद्रीय संचार मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया: केंद्रीय संचार मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया

आज डाक विभाग ने बीकानेर हाउस, नई दिल्ली में आयोजित एक विशेष समारोह में प्रसिद्ध कलाकार, वास्तुकार, मूर्तिकार और लेखक दिवंगत श्री सतीश गुजराल के शताब्दी वर्ष पर एक स्मारक डाक टिकट जारी किया। यह टिकट केंद्रीय संचार तथा उत्तरी पूर्वी क्षेत्र विकास राज्य मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिन्हा द्वारा जारी किया गया, जिनके साथ पोस्टमास्टर जनरल (डायरेक्टर जनरल पोस्टल सर्विसेज) श्री जितेन्द्र गुप्ता, मुख्य डाकपाल महानिदेशक दिल्ली सर्कल कर्नल अखिलेश कुमार पांडेय, प्रख्यात भारतीय चित्रकार, मूर्तिकार और मुर्तिकार पद्म भूषण श्री जतिन दास, नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट के पूर्व निदेशक डॉ. राजीव लोचन, श्रीमती रसील गुज़्राल अंसल, गुजराल परिवार के सदस्य और अन्य गण्यमान्य अतिथि उपस्थित थे।

केंद्रीय संचार मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने दिवंगत श्री सतीश गुजराल को एक रचनात्मक प्रतिभा बताते हुए कहा कि उनका जीवन दृढ़ता, नवाचार और उत्कृष्टता का परिचायक रहा। उन्होंने गुजराल के चित्रकार, मूर्तिकार, वास्तुकार, मुर्तिकार और लेखक के रूप में असाधारण योगदानों को उजागर किया और कहा कि उनके कार्य भारत व विश्व भर में पीढ़ियों को प्रेरित करते रहते हैं।

डाक विभाग के साथ दिवंगत श्री सतीश गुजराल के लंबे और प्रिय संबंधों को स्मरण करते हुए, केंद्रीय मंत्री ने बताया कि प्रसिद्ध कलाकार सिर्फ कला रचते ही नहीं थे, बल्कि अपने डाक टिकट डिजाइनों के माध्यम से विचारों को प्रभावशाली दृश्य कथाओं में भी बदलते थे। उन्होंने यह भी स्मरण कराया कि वीएसएनएल के 125वाँ वार्षिक स्मारक पर जारी डाक टिकट में गुजराल ने संचार के विचार को प्रभावशाली दृश्य रूपकों में रूपांतरित किया था। इसी तरह, वित्तीय समावेशन के डाक टिकट में उन्होंने प्रगति, सशक्तिकरण और राष्ट्रीय विकास के विषयों को सूचक प्रतीकों के माध्यम से जीवंत किया था, न कि केवल शाब्दिक रूपक से।

डाक टिकटों के स्थायी महत्व पर ज़ोर देते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा, “डाक टिकट आकार में बहुत छोटे होते हैं, पर वे हमारे देश की आत्मा को समेटे रहते हैं। वे 140 करोड़ लोगों का जज्बा ले कर शहर से शहर, गाँव से गाँव, तालुका से तालुका तक यात्रा करते हैं, और पीढ़ियों तक भारत के इतिहास, संस्कृति और सामूहिक स्मृतियों को पहुँचाते हैं।” उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह स्मारक डाक टिकट सतीश गुजराल की विरासत को संरक्षित करेगा और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देगा।

टिकट पर दिवंगत श्री सतीश गुजराल की एक मुद्रित आकृति है जिसमें वह बैठकर हाथ में सक्रिय रूप से पेंटब्रश थामे हुए दिखाई देते हैं, जो उनकी जीवनभर की कला और रचनात्मकता के प्रति लगन का प्रतीक है। यह रचना उन्हें विचारशील मुद्रा में दर्शाती है, जो उनकी कलात्मक दृष्टि की गहराई और बहुमुखी प्रतिभा को दर्शाती है। पृष्ठभूमि उनके विशिष्ट शैलियों से प्रेरित जीवंत कलात्मक रंग-रूप में, समृद्ध बैंगनी और नीले शेड्स में प्रतिपादित की गई है, जो गरिमा और रचनात्मक अभिव्यक्ति का भाव संप्रेषित करती है। यह टिकट डिजाइनर श्री अनुज कुमार द्वारा डिज़ाइन किया गया है और इसका प्रस्ताव श्रीमती रसील गुजराल अंसल ने रखा था।

दिवंगत श्री सतीश गुजराल भारत के सबसे प्रमुख रचनात्मक विभूतियों में से एक थे जिनका करियर सात दशक से अधिक वर्षों तक फैला हुआ था। पद्म विभूषण से सम्मानित, उन्होंने भारतीय कला, वास्तुकला और संस्कृति में महत्वपूर्ण योगदान दिया और ऐसी विरासत छोड़ी जो विश्वभर के कलाकारों के लिए प्रेरणा बनी रहती है। यह स्मारक डाक टिकट उनके जीवन, उपलब्धियों और भारत की सांस्कृतिक विरासत में उनके स्थायी योगदान का उत्सव मनाता है।

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