
आम आदमी पार्टी ने आगामी 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को होने वाले विशाल आंदोलन को सफल बनाने के लिए कमर कस लिया है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने सोमवार को दिल्ली के सभी विधायकों, पार्षदों, जिलाध्यक्षों, विधानसभा अध्यक्षों और वॉर्ड ऑब्जवर्स के साथ मैराथन बैठक की। बैठक में आंदोलन को सफल बनाने के लिए बैक-अप लीडरशिप तैयार की गई, ताकि पहली पंक्ति के नेताओं को भाजपा सरकार की पुलिस गिरफ्तार भी कर ले तो आंदोलन का नेतृत्व दूसरी और तीसरी पंक्ति की लीडरशिप कर सके। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि सूत्रों के अनुसार, जंतर-मंतर 2.0 का समर्थन करने वाले संगठनों के नेताओं को जल्द ही झूठे मुकदमों में गिरफ्तार किया जाएगा। इन गिरफ्तारियों के बावजूद शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन जारी रहना चाहिए। इसके लिए नेताओं और संगठनों को एक बैकअप नेतृत्व तैयार करना चाहिए। संवाद के लिए भी एक प्लान बी होना चाहिए। यह आंदोलन किसी भी व्यक्ति, संगठन या राजनीतिक दल से बहुत बड़ा है।
सौरभ भारद्वाज ने आगे कहा कि 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर जो बड़ा आंदोलन हो रहा है, जिसमें देश के कोने-कोने से लोग चुनाव आयोग के खिलाफ आवाज उठाने आएंगे, उस आंदोलन के नाम से ही सरकार घबराई हुई है। सरकार चलाने वाले लोग रात को सो नहीं रहे हैं कि 10 अक्टूबर को क्या होगा और उसके लिए सरकार ने कुछ योजना बनाई है। उन्होंने बताया कि हमें बार-बार कुछ लोगों के संदेश आ रहे हैं कि अलग-अलग संस्थाओं के जो भी लोग इस पूरे आंदोलन से जुड़े हुए हैं, उन पर पुलिस बहुत जल्द गंभीर कार्यवाही करने वाली है और उनको अलग-अलग झूठे मुकदमों में गिरफ्तार किया जाएगा। मगर यह आंदोलन उन नेताओं से बड़ा है। यह आंदोलन किसी भी राजनीतिक पार्टी या संस्था से बड़ा है। यह आंदोलन 140 करोड़ देशवासियों का आंदोलन है, इसलिए गिरफ्तारी चाहे किसी की भी हो जाए, यह आंदोलन रुकना नहीं चाहिए।
सौरभ भारद्वाज ने सभी नेताओं और संस्थाओं से कहा कि सभी अपना बैकअप प्लान तैयार करें। मान लीजिए कि 6 अक्टूबर को सभी की पहली पंक्ति के नेता कई महीनों के लिए गिरफ्तार हो जाते हैं, तो दूसरी पंक्ति के नेता कौन होंगे। अगर दूसरी पंक्ति के नेता भी गिरफ्तार होते हैं, तो तीसरी पंक्ति के नेता कौन होंगे। बात सिर्फ शीर्ष नेताओं की गिरफ्तारी की नहीं है, सभी के मध्यम और निचले स्तर के नेताओं को भी गिरफ्तार किया जा सकता है। 10 अक्टूबर के प्रदर्शन से एक दिन पहले यानी 9 अक्टूबर को हो सकता है कि सभी के जिला और विधानसभा स्तर के नेताओं को हिरासत में ले लिया जाए। ऐसे में संचार कैसे होगा, संदेश कैसे पहुंचेगा और उन लोगों के लिए संदेश कौन लेकर जाएगा, इस सबकी तैयारी तमाम संस्थाओं को करनी चाहिए।
सौरभ भारद्वाज ने आगे कहा कि दूसरी और सबसे जरूरी बात यह है कि जब कोई नेता किसी प्रदर्शन में मौजूद होता है, तो वह पुलिस और प्रशासन के साथ बात करता है और प्रदर्शन को शांतिपूर्ण रखता है। बिना नेता के प्रदर्शन को शांतिपूर्ण रखना मुश्किल हो जाता है और यह दुस्साहस यह सरकार करने जा रही है। इसके बावजूद कोशिश यह रहनी चाहिए कि यह प्रदर्शन पूरी तरह से लोकतांत्रिक, संवैधानिक, कानूनी और शांतिपूर्ण रहे। इसलिए एक नेतृत्व के बाद दूसरा नेतृत्व मौजूद होना चाहिए जो इस पूरे प्रदर्शन की कमान भी संभाले और इसे शांतिपूर्ण भी रखे।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि सभी के व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम अकाउंट भी ब्लॉक हो सकते हैं। ऐसे में सभी की बातचीत का माध्यम क्या होगा, व्हाट्सएप की जगह सिग्नल का इस्तेमाल होगा या टेलीग्राम का, इस पर भी सभी को सोचना पड़ेगा। यह वक्त हर चीज का बैकअप प्लान तैयार रखने का है। सभी लोग प्लान बी और प्लान सी तैयार रखें। यह सबसे बड़ा आंदोलन है और इसी आंदोलन से इस देश को, इसकी राजनीति को, इसके प्रजातंत्र को और इसके संविधान को बचाया जा सकता है। इसलिए सभी लोग तैयार हो जाएं।



