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मोमोज खाने के बाद 10 साल की लड़की का लिवर हो गया फेल

बुराड़ी में रहने वाला एक परिवार तब दुखी हुआ जब उनकी 10 साल की बेटी का दिमाग लगभग काम करना बंद कर दिया। उसे छोटी-छोटी बातें भी याद नहीं रहती थीं और खुद से चलना भी मुश्किल हो गया था। धीरे-धीरे हालत और खराब होती गई।

बुराड़ी में रहने वाला एक परिवार तब दुखी हुआ जब उनकी 10 साल की बेटी का दिमाग लगभग काम करना बंद कर दिया। उसे छोटी-छोटी बातें भी याद नहीं रहती थीं और खुद से चलना भी मुश्किल हो गया था। धीरे-धीरे हालत और खराब होती गई।

जांच में पता चला कि लड़की का लिवर फेल हो गया था। शरीर में ज़हरीले तत्वों के इन्फेक्शन की वजह से दिमाग में सूजन आ गई थी, जिसकी वजह से उसे ICU में भर्ती कराना पड़ा। उसकी यह हालत मोमोज जैसे फास्ट फूड की वजह से हुई थी।

दादा से पैसे लेकर बाहर से मोमोज लाती थी

बच्ची के माता-पिता दोनों नौकरी करते हैं। जब वे काम की वजह से दिन में घर पर नहीं होते थे, तो बच्ची अपने दादा से पैसे लेकर बाहर से मोमोज वगैरह लाती थी और बड़े चाव से खाती थी। प्लाज़्माफेरेसिस तकनीक से जान बचाने के बाद अब उस मासूम बच्ची ने हमेशा के लिए मोमोज खाना छोड़ दिया है।

माता-पिता की पीड़ा: ऐसे शुरू हुई परेशानी

बच्ची की मां सावित्री माथुर बताती हैं कि उनके पति किशोर मोबाइल का काम करते हैं और वह खुद मुखर्जी नगर में केयरटेकर का काम करती हैं। उनकी दो बेटियां हैं। तान्या (10 साल) और गौरी (8 साल)।

शुरुआती लक्षण: चीजें भूलना और थकान

मां के मुताबिक, वह बच्चों को घर का बना खाना ही देती हैं, लेकिन नौकरी की वजह से वह दिन भर बाहर रहती हैं। स्कूल से आने के बाद तान्या अपने दादा से पैसे लेकर मोमोज या चिप्स खाती थी। धीरे-धीरे वह चीजें भूलने लगी और हर समय थकी रहती थी। बाद में उसकी हालत इतनी बिगड़ गई कि वह मुश्किल से खड़ी हो पाती थी। हॉस्पिटल में जांच के दौरान पता चला कि उसे गंभीर जॉन्डिस है और उसकी हालत बहुत क्रिटिकल हो गई थी।

मेडिकल चमत्कार: लिवर ट्रांसप्लांट टल गया

पहले, डॉक्टरों ने लिवर ट्रांसप्लांट की सलाह दी थी, लेकिन असली हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने ‘प्लाज़्माफेरेसिस’ के ज़रिए लड़की का सफल इलाज किया।

डॉक्टरों की चेतावनी: 35% बच्चों में फैटी लिवर के लक्षण

पीडियाट्रिक्स डिपार्टमेंट के डॉ. शैलेश शर्मा के मुताबिक, दिल्ली में लगभग 35% बच्चों में फैटी लिवर के लक्षण दिख रहे हैं। इसके मुख्य कारण फास्ट फूड, ज़्यादा स्क्रीन टाइम और फिजिकल एक्टिविटी की कमी हैं।

मुख्य कारण: फास्ट फूड, स्क्रीन टाइम और एक्सरसाइज की कमी

फास्ट फूड, स्क्रीन टाइम (मोबाइल/टीवी का ज़्यादा इस्तेमाल) और फिजिकल एक्टिविटी की कमी इसके मुख्य कारण हैं। अब कम उम्र में भी गंभीर लिवर फेलियर के मामले सामने आ रहे हैं, जैसा कि इस मामले में देखा गया।

प्लाज़्माफेरेसिस क्या है?

प्लाज़्माफेरेसिस में प्लाज़्मा की जगह शरीर के अंदर मौजूद सभी ज़हरीले तत्व निकाल दिए जाते हैं। इसकी जगह शुद्ध प्लाज़्मा शरीर में डाला जाता है।

इससे लिवर को आराम मिलता है और वह जल्दी ठीक हो जाता है। लड़की को दो यूनिट प्लाज़्मा चढ़ाना पड़ा, लेकिन इसका फ़ायदा यह हुआ कि लिवर ट्रांसप्लांट की ज़रूरत टल गई।

कम पानी पीने और फास्ट फूड से हो रहा है नुकसान

डॉ. अपूर्वा पांडे ने बताया कि OPD में आने वाले 30 से 40 परसेंट मरीज़ों को ‘फैटी लिवर’ है, जिनमें से ज़्यादातर की उम्र 20 से 50 साल के बीच है।

बच्चे हों या बड़े, दिल्ली में लोग दिन भर में मुश्किल से एक से डेढ़ लीटर पानी पी रहे हैं, जबकि मेटाबॉलिज़्म के लिए रोज़ कम से कम ढाई लीटर पानी पीना चाहिए। इसके अलावा रोज़ के खाने-पीने में फास्ट फूड की बढ़ती मात्रा भी लिवर को नुकसान पहुंचा रही है।

 

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