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गति शक्ति विश्वविद्यालय में चौथा दीक्षांत समारोह आयोजित। 121 छात्रों ने बी.टेक. और एमबीए कार्यक्रम से स्नातक किया

गति शक्ति विश्वविद्यालय में चौथा दीक्षांत समारोह आयोजित। 121 छात्रों ने बी.टेक. और एमबीए कार्यक्रम से स्नातक किया

गति शक्ति विश्वविद्यालय (जीएसवी) का चौथा दीक्षांत समारोह 17 जुलाई 2026 को आयोजित किया गया। इस समारोह में भारत के माननीय नागरिक उड्डयन मंत्री श्री किंजरापु राम मोहन नायडू मुख्य अतिथि थे जबकि विशिष्ट अतिथियों में श्री ई. श्रीधरन (भारत के मेट्रो मैन के रूप में लोकप्रिय, दिल्ली मेट्रो रेल निगम लिमिटेड के पूर्व निदेशक), डॉ. हेमांग जोशी (सांसद, वडोदरा), बड़ौदा की राजमाता महामहिम शुभांगिनीराजे गायकवाड़, श्री समीर कुमार सिन्हा (सचिव, नागरिक उड्डयन, भारत सरकार) और श्री सुकरण सिंह (सीईओ एवं निदेशक, टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड) शामिल थे।

121 छात्रों को बी.टेक और एमबीए कार्यक्रमों से संबंधित डिग्रियां प्रदान की गईं। विश्वविद्यालय ने पहली बार मेट्रो रेल प्रबंधन में भी एमबीए की डिग्री प्रदान की। इस अवसर पर, जीएसवी ने देश में परिवहन और अवसंरचना के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए श्री ई. श्रीधरन को मानद पीएचडी की उपाधि से सम्मानित किया।

विभिन्न अध्ययन शाखाओं में अकादमिक उत्कृष्टता के लिए विवेक यादव, संदीप पटेल, अभिनंदन गुप्ता, ऋषभ त्रिपाठी और सुरेश सेंगुंदरमुदलियार को स्वर्ण पदक प्रदान किए गए। श्री दुर्गेश कुमार और श्री संदीप पटेल को वर्ष 2026 के लिए उत्कृष्ट परियोजना पुरस्कार दिया गया जबकि वर्ष 2026 के सर्वश्रेष्ठ स्नातक छात्र का पुरस्कार विवेक कुमार को प्रदान किया गया।

दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में अपने संबोधन में श्री किंजरापु राममोहन नायडू ने ‘तीन एम’ पर ध्यान केंद्रित किया: गति, संवेग और मिशन – जो क्रमशः दिशा, गति और उद्देश्य का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने परिवहन क्षेत्र और विशेष रूप से विमानन क्षेत्र में देश की प्रगति, पीएम गति शक्ति आदि पर प्रकाश डाला। उन्होंने देश में युवाओं के लिए अवसर सृजित करने में रखरखाव, मरम्मत और ओवरहाल (एमआरओ) क्षेत्र की भूमिका पर बल दिया। उन्होंने नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) और जीएसवी की साझेदारी के चार महीनों के भीतर विकसित विमान रखरखाव इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम की प्रशंसा की और जीएसवी को नागरिक उड्डयन मंत्रालय के पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया। उन्होंने विश्वविद्यालय के उद्योग-प्रेरित दृष्टिकोण की व्यापक रूप से सराहना करते हुए इसे संपूर्ण उच्च शिक्षा क्षेत्र के लिए एक आदर्श मॉडल बताया।

डॉ. ई. श्रीधरन ने विशिष्ट अतिथि के रूप में इस अवसर की शोभा बढ़ाई और निरंतर सीखने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए समय की पाबंदी, ईमानदारी और पेशेवर दक्षता के साथ-साथ सही दृष्टिकोण रखने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने उपस्थित युवाओं को समाज और देश के प्रति अपना योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया और कहा कि इसके लिए उन्हें अच्छे चरित्र और स्वास्थ्य का होना आवश्यक है।

वडोदरा के सांसद डॉ. हेमांग जोशी ने कहा कि इससे बेहतर संयोग और क्या हो सकता था कि जिस दिन भारत के माननीय प्रधानमंत्री द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित पहली हाइड्रोजन ट्रेन का शुभारंभ किया गया उसी दिन छात्रों को डिग्री प्रदान की जा रही है। उन्होंने विश्वविद्यालय के 100% रोजगार देने के रिकॉर्ड की सराहना की और छात्रों से इस डिग्री का भरपूर लाभ उठाने का आग्रह किया क्योंकि यह कोई मंजिल नहीं बल्कि उनकी यात्रा का एक पड़ाव मात्र है।

महामहिम शुभांगिनीराजे गायकवाड़ ने स्नातक छात्रों को मूल्यों पर दृढ़ रहने और सतत विकास के प्रति संवेदनशील रहने की सलाह दी। वहीं श्री सुकरण सिंह ने मजबूत परीक्षण प्रणालियों और सहायक नियमों की आवश्यकता पर बल देते हुए टाटा की एयरोस्पेस और रक्षा विनिर्माण पहलों का उल्लेख किया और स्नातकों को चुनौतियों का सामना करते हुए और नवाचार को बढ़ावा देते हुए परिवर्तन का सूत्रधार बनने के लिए प्रोत्साहित किया। जीएसवी के कुलपति प्रोफेसर मनोज चौधरी ने विश्वविद्यालय की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की।

रेल मंत्रालय के अधीन एक केंद्रीय विश्वविद्यालय, गति शक्ति विश्वविद्यालय की स्थापना संसद के एक अधिनियम द्वारा 6 दिसंबर 2022 में की गई थी। कुलाधिपति श्री अश्विनी वैष्णव (केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री) इसके अध्यक्ष हैं। वर्तमान में यह विश्वविद्यालय रेल अभियांत्रिकी, विमानन अभियांत्रिकी एवं संचालन, समुद्री अभियांत्रिकी, रसद एवं आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन, मेट्रो रेल प्रबंधन, बंदरगाह एवं जहाजरानी रसद एवं सड़क एवं राजमार्ग अभियांत्रिकी आदि क्षेत्रों में स्नातक, स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट स्तर के कार्यक्रम प्रदान कर रहा है जो संपूर्ण परिवहन अवसंरचना और रसद क्षेत्र को कवर करते हैं। नियमित शैक्षणिक कार्यक्रमों के अलावा, जीएसवी रेल (परिवीक्षाधीन और सेवारत अधिकारी दोनों), रक्षा बलों (सेना, वायु सेना, नौसेना) और सिविल सेवाओं के अधिकारियों को उनकी विशेषज्ञता के क्षेत्रों में कार्यकारी प्रशिक्षण प्रदान करने पर विशेष ध्यान देता है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप, जीएसवी मांग-आधारित पाठ्यक्रम का अनुसरण करता है और इसका उद्देश्य देश के विकास के लिए उत्कृष्ट मानव संसाधन और अनुसंधान तैयार करने हेतु एक “उद्योग-संचालित और नवाचार-आधारित” विश्वविद्यालय बनना है। जीएसवी ने संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र का केंद्र बिंदु बनने के मिशन के साथ, उद्योग-उन्मुख पाठ्यक्रम, अनुभवात्मक शिक्षा, ज्ञान साझाकरण और इंटर्नशिप के लिए विश्व भर के अग्रणी संस्थानों और उद्योगों के साथ सहयोग किया है। इससे रोजगार के लिए तैयार स्नातकों को तैयार करने में मदद मिलती है। विश्वविद्यालय प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के लिए क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण हेतु एक केंद्रीय नोडल एजेंसी के रूप में कार्य कर रहा है और अपने विशेष पाठ्यक्रम के माध्यम से पहले ही 24 लाख से अधिक अधिकारियों को प्रशिक्षित कर चुका है।

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