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छत्रपति मर्डर केस में नया मोड़, राम रहीम को बरी करने के खिलाफ मामला SC पहुंचा

छत्रपति मर्डर केस में नया मोड़, राम रहीम को बरी करने के खिलाफ मामला SC पहुंचा

डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ सकती हैं। पत्रकार रामचंद्र छत्रपति मर्डर केस में राम रहीम को बरी किए जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया है। यह याचिका दिवंगत पत्रकार के बेटे अरिदमन ने दायर की है। सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले की सुनवाई नवंबर के तीसरे हफ्ते में करेगा। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने हरियाणा सरकार के रवैये पर भी टिप्पणी की।

यह मामला पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या से जुड़ा है। उनके बेटे अरिदमन ने पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है जिसमें राम रहीम को इस केस में बरी कर दिया गया था। हाई कोर्ट ने इसी साल 7 मार्च को राम रहीम को मर्डर केस में बरी कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि CBI राम रहीम पर लगाए गए आरोपों को ठीक से साबित नहीं कर पाई। अब इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में नोटिस जारी कर संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान राम रहीम की तरफ से सीनियर वकील आर. पासन पेश हुए। उन्होंने कोर्ट को बताया कि हरियाणा सरकार ने हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ कोई अपील फाइल नहीं की है। इस पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने कमेंट किया कि ‘हम जानते हैं कि राज्य सरकार शायद अपील न करे।’ कोर्ट के इस कमेंट को राम रहीम के प्रति हरियाणा सरकार के कथित नरम रवैये से जोड़कर देखा जा रहा है। जेल की सजा काटने के बाद राम रहीम को कई बार पैरोल और टेम्पररी रिहाई मिल चुकी है।

आपको बता दें कि रामचंद्र छत्रपति हरियाणा के सिरसा के रहने वाले थे। वह अपने अखबार ‘पूरा सच’ के जरिए डेरा सच्चा सौदा से जुड़े कई मामलों पर रिपोर्टिंग करते थे। अक्टूबर 2002 में उन्हें उनके घर के बाहर गोली मार दी गई थी। गंभीर रूप से घायल छत्रपति की बाद में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। मामले की जांच बाद में सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन यानी CBI को सौंप दी गई थी।

रामचंद्र छत्रपति हरियाणा के सिरसा के एक पत्रकार थे। उन्होंने अपने अखबार “पूरा सच” के जरिए डेरा सच्चा सौदा से जुड़े कई मामलों पर रिपोर्टिंग की थी। अक्टूबर 2002 में, उन्हें उनके घर के बाहर गोली मार दी गई थी। छत्रपति, जो गंभीर रूप से घायल थे, बाद में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। बाद में मामले की जांच सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) को सौंप दी गई।

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