
राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्रदान किए और सभी पुरस्कार विजेताओं को उनकी प्रतिभा, समर्पण और कड़ी मेहनत के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि फिल्म निर्माण एक सामूहिक प्रयास है। उन्होंने पुरस्कार विजेताओं से अपनी-अपनी टीम के हर उस सदस्य का आभार व्यक्त करने का आग्रह किया, जिसकी मेहनत और योगदान से ये फिल्में संभव हो पाईं।
राष्ट्रपति ने थिएटर और सिनेमा में उत्कृष्ट योगदान के लिए दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित श्री अनंत नाग को बधाई दी। राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय सिनेमा देश की विविध भाषाओं, परंपराओं, आकांक्षाओं और संघर्षों को दर्शाता है। उन्होंने राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के आयोजन स्थल के रूप में एकता नगर के चयन की सराहना की, जो भारत की सांस्कृतिक और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है।
क्रिएटिव इकोनॉमी में सम्मान और सामाजिक सुरक्षा का आह्वान करते हुए, राष्ट्रपति ने कहा कि क्रिएटिव कम्युनिटी के वर्कर, छोटे कलाकार, सहायक और संघर्ष कर रहे सदस्य सम्मान और सामाजिक सुरक्षा के हकदार हैं। उन्होंने एक व्यापक मानवीय दृष्टिकोण सुनिश्चित करने के लिए सभी जूरी में महिलाओं की भागीदारी की भी बात कही। 
राष्ट्रपति ने बच्चों और युवाओं पर लोकप्रिय कलाकारों के गहरे प्रभाव को रेखांकित करते हुए, सफल कलाकारों से अनुशासित जीवनशैली अपनाने की प्रेरणा देने और सेहत के लिए हानिकारक चीजों का विज्ञापन न करने का आग्रह किया। राष्ट्रपति ने कहा कि देश में बन रही फिल्मों की बेहतरीन क्वालिटी देखकर उन्हें पूरा भरोसा है कि भारतीय सिनेमा दुनिया के सामने एक नया मानक तय कर सकता है।
जब राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने श्री अनंत नाग को प्रतिष्ठित दादासाहेब फाल्के पुरस्कार (2024) से सम्मानित किया, तो वह क्षण कहानियों, रंगमंच और सिनेमा के प्रति उनके जीवनभर के समर्पण का उत्सव बन गया। यह सम्मान भारतीय सिनेमा में दशकों से दिए गए उनके यादगार अभिनय और अमूल्य योगदान को समर्पित है।
अनंत नाग ने बेहद सादगी के साथ यह सम्मान स्वीकार किया और अपनी इस पूरी यात्रा में साथ देने वाले लोगों और मिले अनुभवों का सहृदय धन्यवाद किया। अनंत नाग ने अपने शुरुआती दौर को याद करते हुए बताया कि आश्रम में बचपन बिताने के बाद वे मुंबई पहुँचे, जहाँ नाटक के मंच से उनके अभिनय की शुरुआत हुई। थिएटर ही उनके करियर का मुख्य आधार बना, जहाँ उन्होंने फिल्मों में पर्दापण से पहले करीब 50 नाटकों में काम किया। बाद में उन्हें मशहूर फिल्म निर्माता श्याम बेनेगल जैसे दिग्गजों के साथ फिल्मों में काम करने का मौका मिला।
श्री अनंत नाग ने बताया कि उन्होंने स्वेच्छा से कन्नड़ सिनेमा को चुना और बेंगलुरु को अपनी कर्मभूमि बनाया। पिछले वर्ष माननीय राष्ट्रपति द्वारा उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किए जाने का स्मरण करते हुए, उन्होंने इस वर्ष भी राष्ट्रपति के कर-कमलों से दादासाहेब फाल्के पुरस्कार प्राप्त होने पर अपना गहरा आभार व्यक्त किया।



