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संसद का मानसून सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित; दोनों सदनों से पारित हुए 12 विधेयक

संसद का मानसून सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित; दोनों सदनों से पारित हुए 12 विधेयक

संसद का मानसून सत्र, 2026, जो सोमवार, 20 जुलाई, 2026 से शुरू हुआ था, गुरुवार, 13 अगस्त, 2026 को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया गया है । सत्र के दौरान 25 दिनों की अवधि में कुल 19 बैठकें हुईं।

सत्र के दौरान, लोक सभा में 11 विधेयक और राज्य सभा में 02 विधेयक पुर:स्थापित किए गए। लोक सभा द्वारा 12 विधेयक और राज्य सभा द्वारा 12 विधेयक पारित किए गए। सत्र के दौरान संसद के दोनों सदनों द्वारा कुल 12 विधेयक पारित किए गए।

राष्ट्रपति द्वारा मानसून सत्र से पहले प्रख्यापित किए गए दो अध्यादेशों अर्थात् सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीश संख्या) संशोधन अध्यादेश, 2026 और आय-कर (संशोधन) अध्यादेश, 2026 को प्रतिस्थापित एवं इनके उपबंधों को समाविष्ट करने वाले दो विधेयकों पर दोनों सदनों में विचार और पारित किया गया।

वर्ष 2022-23 के लिए अतिरिक्त अनुदान मांगों पर विचार किया गया और उनसे संबंधित विनियोग विधेयक को लोक सभा में 04.08.2026 को पुर:स्थापित, विचार और पारित किया गया तथा 06.08.2026 को राज्य सभा ने उसे लौटा दिया।

विदेशी अभिदाय (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को जांच और रिपोर्ट हेतु सदनों की संयुक्त समिति को भेजा गया।

लोक परीक्षाओं से जुड़ी विद्यार्थियों की चिंताओं को तुरंत दूर करने के लिए, लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 को लोक परीक्षा प्रणाली की ईमानदारी और विश्वसनीयता को मज़बूत करने की एक बड़ी पहल के रूप में पुर:स्थापित किया गया ताकि 2024 के मूल अधिनियम को संशोधित किया जा सके। इस विधेयक का उद्देश्य अधिनियम के तहत अपराधों की त्वरित जांच और समय पर ट्रायल पक्का करना; राज्य सरकारों और संघ राज्य क्षेत्र प्रशासनों को स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने और स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर नियुक्त करने का अधिकार देना; दो महीने के अंदर जांच और तीन महीने के अंदर ट्रायल पूरा करना अनिवार्य करना; केंद्र सरकार को, जहाँ भी ज़रूरी हो, जांच के लिए स्पेशल टास्क फोर्स गठित करने में मदद करना; अपराधों के लिए सज़ा में बढ़ोतरी करना; और उच्च न्यायालय की डिवीजन बेंच के समक्ष एक समयबद्ध अपीली तंत्र का उपबंध करना है। यह विधेयक संसद के दोनों सदनों से पारित हो गया है और माननीय राष्ट्रपति ने इसे मंज़ूरी दे दी है।

सत्र के दौरान दोनों सदनों द्वारा पारित किए गए अन्य प्रमुख विधेयक इस प्रकार हैं:-

  • राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 का उद्देश्य वर्ष 1971 के मूल अधिनियम में संशोधन करना है ताकि वंदे मातरम, जिसे राष्ट्रीय गीत माना जाता है, को राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 की धारा 3 के दायरे में लाया जा सके, और यह भी उपबंध करना है कि जानबूझकर वंदे मातरम गाने से रोकना या इसे गा रही किसी भी सभा में परेशानी पैदा करना एक अपराध होगा, जिससे राष्ट्रीय गीत को कानूनी सुरक्षा मिलेगी और ऐसे कृत्यों को अधिनियम के तहत सज़ा मिलेगी।
  • जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण (संशोधन) विधेयक 2026 वर्ष 1969 के मूल अधिनियम में संशोधन करके जन्म और मृत्यु के देर से रजिस्ट्रीकरण के लिए नियमों को और सख्त बनाने का प्रयास करता है, जिसमें एक आसान सत्यापन प्रणाली नियत की गई है। विधेयक में एक वर्ष के बाद और दो वर्ष तक रजिस्ट्रीकरण केवल सक्षम एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की मंज़ूरी से और दो वर्ष के बाद केवल फर्स्ट क्लास ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की मंज़ूरी से करने का प्रावधान है।
  • सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 का उद्देश्य वर्ष 2006 के अधिनियम में संशोधन करके सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के निशुल्क और स्वैच्छिक पंजीकरण हेतु एक राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म उपलब्ध कराना और वित्त तक पहुँच को बेहतर बनाकर MSME सेक्टर को मज़बूत करना, सूक्ष्म और छोटे व्यापार के विलंबित भुगतान से पैदा विवादों का तेज़ी से निपटारा करना, व्यापार करने में आसानी को बढ़ावा देना और कुछ नियमों के उल्लंघन से जुड़े अपराधों को अपराध की श्रेणी से हटाना तथा पहली बार में चेतावनी देकर सज़ा के आधार पर लगने वाले जुर्माने की जगह ग्रेडेड पेनल्टी लगाना है।
  • बैंककार बही साक्ष्य विधेयक, 2026 का उद्देश्य “बैंककार बही” की परिभाषा का दायरा बढ़ाना है, ताकि इसमें बैंकों द्वारा रखे जाने वाले सभी तरह के रिकॉर्ड शामिल हों, चाहे वे फिजिकल, इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल, वर्चुअल, क्लाउड-बेस्ड हों या किसी और रूप में हों। इससे एक बड़ा, टेक्नोलॉजी-न्यूट्रल और भविष्य के लिए तैयार कानूनी ढांचा प्राप्त होगा। यह प्रमाणपत्रों को मानक बनाता है और मैनुअल, डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक सत्यापन को मान्यता देता है, साथ ही इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को फिजिकल या इलेक्ट्रॉनिक तरीके से बनाने की सुविधा प्रदान करता है। यह केंद्र सरकार को वित्तीय क्षेत्र में कवरेज बढ़ाने का अधिकार देता है और न्यायिक उत्पादन हेतु “स्पेशल कॉज” को परिभाषित करता है।
  • केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 में संविधान के अनुच्छेद 3 के अनुसार “केरल” राज्य का नाम बदलकर “केरलम” करके संविधान की पहली अनुसूची में संशोधन करने का प्रस्ताव है।
  • राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 का उद्देश्य राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम अधिनियम, 1962 में संशोधन करके केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित की जाने वाली किसी भी दूसरी खाद्य वस्तु को “खाद्य पदार्थों” की सूची में शामिल करने के लिए उसकी परिभाषा में वृद्धि करना, औद्योगिक सामानों पर लागू होने वाली भौगोलिक रोक को हटाना, सांविधिक संदर्भ को अपडेट करके सहकारिता के क्षेत्र को मज़बूत करना, पुराने नियमों को हटाना और निगम को ज़रूरी आकस्मिक अधिकार देना है। इन उपायों से अधिकृत संस्थाओं के साथ क्रेडिट और दूसरी ज़रूरी जानकारी इकट्ठा करने और शेयर करने में आसानी होगी, साथ ही ज़्यादा लचीलापन, कानूनी साफ़गोई और ऑपरेशनल दक्षता प्राप्त होगी और सहकारी विकास हेतु समय पर, सीधी और रिसपोंसिव वित्तीय मदद मिल सकेगी।
  • अधिकरण सुधार विधेयक, 2026 का उद्देश्य विभिन्न अधिकरणों के अध्यक्षों और सदस्यों की योग्यता, नियुक्ति, सेवा की शर्तों और नियमों, अधिकरण के प्रशासन और कामकाज की दक्षता में सुधार करना, स्वायत्तता, पारदर्शिता और एकरूपता लाना, एक राष्ट्रीय अधिकरण आयोग स्थापित करना और उससे जुड़े कानूनों में बदलाव करना और उससे जुड़े या आनुषंगिक मामलों का उपबंध करना है।
  • खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 का उद्देश्य खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 में संशोधन करके खनिज के क्षेत्र में वित्तीय प्रणाली में निश्चितता और स्थिरता तथा पूर्वानुमान का उपबंध करना है, जिससे देश के आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा, जिससे आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य पूरे होंगे और आखिरकार विकसित भारत 2047 का विज़न हासिल होगा।

लोक सभा में पुर:स्थापित किए गए विधेयकों, राज्य सभा में पुर:स्थापित किए गए विधेयकों, संयुक्त समिति में भेजे गए विधेयकों और लोक सभा द्वारा पारित किए गए विधेयकों एवं राज्य सभा द्वारा पारित किए गए विधेयकों और दोनों सदनों द्वारा पारित किए गए विधेयकों की सूची अनुबंध के रूप में संलग्न है।

लोक सभा की उत्पादकता 19% और राज्य सभा की उत्पादकता लगभग 39% रही ।

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