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रक्षा मंत्री ने द्वीपीय देश श्रीलंका की अपनी पहली यात्रा की शुरुआत करते हुए कहा कि संकट की किसी भी घड़ी में भारत हमेशा मजबूती से उसके साथ खड़ा रहेगा

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 8 सितंबर, 2026 को कोलंबो में भारतीय समुदाय के लोगों से बातचीत के साथ श्रीलंका की अपनी पहली यात्रा की शुरुआत की। इस अवसर पर उन्होंने कहा, “जब भी इस द्वीपीय राष्ट्र पर कोई संकट आएगा, भारत हमेशा मजबूती से श्रीलंका के साथ खड़ा रहेगा।” रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत और श्रीलंका के बीच गहरे सांस्कृतिक एवं सभ्यतागत संबंध हैं, जो दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को सशक्त आधार प्रदान करते हैं।

रक्षा मंत्री ने भारत में तेजी से हो रहे आर्थिक बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारा देश दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और वैश्विक आर्थिक विकास में 16 प्रतिशत से अधिक का योगदान दे रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में लगभग 2 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की भारतीय अर्थव्यवस्था पिछले एक दशक में दोगुनी होकर करीब 4 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की हो गई है। श्री सिंह ने कहा कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद वित्त वर्ष (एफवाई) 2026-27 की पहली तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था ने 7.8 प्रतिशत की सुदृढ़ वृद्धि दर्ज की। रक्षा मंत्री ने व्यापक आर्थिक स्थिरता में आए सुधार का भी जिक्र करते हुए कहा कि पिछले 12 वर्षों में औसत महंगाई दर करीब 4.7 प्रतिशत रही है, जबकि इससे पहले यह 10 से 11 प्रतिशत के स्तर पर थी।

श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत से वस्तुओं और सेवाओं का निर्यात 2014 में करीब 45 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 79 लाख करोड़ रुपये हो गया है। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल फोन विनिर्माण क्षेत्र में हुई उल्लेखनीय प्रगति का उल्लेख करते हुए बताया कि इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का उत्पादन 1.9 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 11 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। वहीं, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का निर्यात करीब 38,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया, जो लगभग 700 प्रतिशत की वृद्धि है। रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन विनिर्माता देश बनकर उभरा है। देश में मोबाइल फोन विनिर्माण इकाइयों की संख्या साल 2014 में महज दो थी, जो अब बढ़कर 300 से अधिक हो गई है। मोबाइल फोन का उत्पादन 18,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 5.5 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जबकि मोबाइल फोन का निर्यात करीब 163 गुना बढ़कर 2.6 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। उन्होंने बताया कि ऑटोमोबाइल का निर्यात भी सालाना करीब 50,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 1.20 लाख करोड़ रुपये हो गया है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत ने 38 देशों के साथ व्यापार समझौते किए हैं, जिनमें आठ प्रमुख देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) शामिल हैं। उन्होंने कहा कि 2014 से पहले भारत ने ऐसे केवल चार व्यापार समझौते किए थे। रक्षा मंत्री ने भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच मुक्त व्यापार समझौते को ‘सभी समझौतों की आधारशीला’ बताते हुए कहा कि यह भारत को यूरोपीय संघ के विशाल बाजार तक पहुंच प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि यह समझौता भारत की बढ़ती कूटनीतिक व आर्थिक क्षमता को भी दर्शाता है।

श्री राजनाथ सिंह ने भारत के प्रति वैश्विक विश्वसनीयता और देश की क्षमताओं में हुई उल्लेखनीय वृद्धि का श्रेय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को दिया। उन्होंने कहा कि 12 साल पहले की तुलना में, आज जब भारत अंतरराष्ट्रीय मंच पर कोई बात रखता है तो दुनिया उसे सुनती है। रक्षा मंत्री ने दोनों देशों के लोगों के बीच एक सेतु के रूप में कार्य करने के लिए भारतीय प्रवासियों की भी सराहना की।

राजनाथ सिंह ने रक्षा क्षेत्र में हुए बदलाव के बारे में कहा कि 12 साल पहले भारत सिर्फ 600 करोड़ रुपये के रक्षा उपकरण निर्यात करता था। अब यह आंकड़ा लगभग 39,000 करोड़ रुपये के अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। साथ ही रक्षा मंत्री ने कहा कि जो रक्षा बजट वित्त वर्ष 2013-14 में लगभग 2 लाख करोड़ रुपये था, वह वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 7.25 लाख करोड़ रुपये हो गया है। उन्होंने कहा कि यह बढ़ोतरी भारत की बढ़ती क्षमताओं और एक मजबूत तथा आत्मनिर्भर रक्षा क्षेत्र की दिशा में देश की निरंतर यात्रा को दर्शाती है।

श्री राजनाथ सिंह ने बताया कि आज भारत के पास दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्ट-अप इकोसिस्टम है और 2014 से देश में यूनिकॉर्न की संख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि यह भारत के युवाओं की नई सोच और उद्यमिता के साहस को प्रदर्शित करता है।

रक्षा मंत्री ने भारत की कराधान व्यवस्था में किये गए अहम सुधारों के बारे में विस्तार से बताते हुए इस बात पर बल दिया कि वस्तु एवं सेवाकर लागू होने से ‘एक देश, एक कर ‘ व्यवस्था बनी है, जबकि कर में राहत के उपायों से व्यक्तिगत करदाताओं पर बोझ कम हुआ है।

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने जन-कल्याण पर आर्थिक विकास के प्रभाव के बारे में बात करते हुए कहा कि देश में लगभग 25 करोड़ लोगों को गरीबी के चक्र से बाहर निकाला गया है। उन्होंने ग्रामीण और शहरी दोनों तरह के क्षेत्रों के लोगों की गरीबी में आई बड़ी कमी का जिक्र करते हुए सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था के व्यापक विस्तार के बारे में भी जानकारी दी। श्री राजनाथ सिंह ने बताया कि वर्ष 2014 में जहां लगभग 25 करोड़ नागरिक सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के दायरे में थे, वहीं अब करीब 95 करोड़ भारतीयों को इनका लाभ मिल रहा है। उन्होंने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के परिवर्तनकारी प्रभाव पर भी जोर दिया। इस संदर्भ में रक्षा मंत्री ने ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी के तेजी से विस्तार और यूपीआई के अभूतपूर्व प्रसार को भारत के डिजिटल बदलाव की महत्वपूर्ण उपलब्धियां बताया।

रक्षा मंत्री ने भारत में आधारभूत बुनियादी ढांचे के तेजी से हो रहे विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के हाईवे, एयरपोर्ट और अन्य परिवहन नेटवर्क में लगातार बढ़ोतरी की जा रही है। उन्होंने बताया कि भारतीय रेलवे शत प्रतिशत विद्युतीकरण के लक्ष्य की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। रक्षा मंत्री ने नागरिकों तक कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सीधे पहुंचाने में जेएएम नेटवर्क और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) व्यवस्था की महत्वपूर्ण भूमिका का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण  के माध्यम से अब तक लोगों के बैंक खातों में 51 लाख करोड़ रुपये ट्रांसफर किए जा चुके हैं।            

इस कार्यक्रम में श्रीलंका सरकार की कैबिनेट मंत्री श्रीमती सरोजा सावित्री पॉलराज, पश्चिमी प्रांत के गवर्नर श्री हनीफ यूसुफ, श्रीलंका सरकार के उप-मंत्री श्री सुंदरलिंगम प्रदीप, श्रीलंका में भारत के उच्चायुक्त श्री संतोष झा, भारत के वरिष्ठ नागरिक एवं सैन्य अधिकारी तथा भारतीय समुदाय के सदस्य उपस्थित थे।

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