
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को जंतर मंतर पर तिरंगा झंडा फहराने पर भाजपा की दिल्ली पुलिस की ओर से की कई गिरफ्तारी और अब 5 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने पर आम आदमी पार्टी ने कड़ी आपत्ति जताई है। ‘‘आप’’ ने इसकी तुलना 1975 के आपातकाल से करते हुए सीजेपी नेताओं को जेल भेजने को गलत बताया है। पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने एक्स पर कहा कि क्या अब अपने ही देश में अपना तिरंगा झंडा फहराना भी अपराध हो गया है? तिरंगा झंडा फहराने के जुर्म में सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी बेहद ही हास्यास्पद है।
भाजपा और उसकी मातृ संस्था को तिरंगे से नफरत है तो क्या अब हमारे युवा भी नहीं फहरा सकते?
उधर, “आप” के वरिष्ठ नेता व राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने प्रधानमंत्री मोदी से कहा कि क्या वे अंग्रेज हैं और क्या इस देश में ब्रिटिश राज चल रहा है? यह सवाल इसलिए है क्योंकि भारत में भारत माता की जय बोलना और तिरंगा फहराना अब गुनाह और अपराध हो गया है। सीजेपी के नेता सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्या शिंदे ने जंतर-मंतर पर जाकर तिरंगा फहराया और भारत माता की जय के नारे लगाए। इस देश का नौजवान और युवा करोड़ों बार भारत माता की जय बोलेगा और तिरंगा फहराएगा। मोदी जी और उनकी मातृ संस्था को तिरंगे से नफरत हो सकती है, क्योंकि उनकी संस्था ने 52 साल तक नागपुर मुख्यालय पर तिरंगा नहीं फहराया। लेकिन जिन नौजवानों ने तिरंगा फहराकर भारत माता का गौरव बढ़ाने का काम किया, सरकार ने उन्हें पकड़कर 5 दिन के लिए जेल में डाल दिया।
संजय सिंह ने आगे कहा कि आशुतोष रांका और सौरभ दास को जेल में डालकर मोदी जी सोचते हैं कि वे अपनी तानाशाही से देश के नौजवानों की आवाज दबा देंगे। वे सोचते हैं कि इस तानाशाही से वोट चोरी, पूरे देश के लोकतंत्र की चोरी, सरकारों की चोरी और विधायकों व सांसदों की चोरी का उनका कारोबार चलता रहेगा। मोदी जी की तानाशाही का अब अंत आ रहा है। उन्होंने कहा कि मैंने पहले भी समझाया था और फिर समझा रहा हूं कि नौजवानों से पंगा मत लो, यह मोदी जी को बहुत महंगा पड़ेगा। आशुतोष रांका और सौरभ दास को गिरफ्तार करके मोदी जी ने एक बार फिर बहुत बड़ी गलती की है और यह बात उन्हें बहुत जल्द समझ में आ जाएगी।
1975 की इमरजेंसी की तरह मोदी सरकार बड़े नेताओं को गिरफ्तार कर जनता की आवाज दबा रही
“आप” के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने 1975 और 2026 की स्थितियों की तुलना करते हुए कहा कि दोनों समय में लगभग एक जैसी घटनाएं हुई हैं। 1975 में प्रधानमंत्री के चुनाव में धांधली, युवा और मजदूर आंदोलनों, आर्थिक संकट और राजनीतिक अस्थिरता के कारण आपातकाल लगा था और राज नारायण जैसे नेताओं की गिरफ्तारी हुई थी। ठीक उसी तरह 2026 में भी चुनाव में धांधली के आरोप, जेन-जी आंदोलन, आर्थिक मंदी, विदेश नीति के सबसे निचले स्तर पर पहुंचने और सौरव दास व आशुतोष रांका की गिरफ्तारी के साथ आपातकाल जैसे हालात बन गए हैं।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि कॉकरोच मूवमेंट के सौरभ दास और आशुतोष रांका को पांच दिन के लिए तिहाड़ जेल भेज दिया गया है, जबकि अब तक ऐसा कुछ नहीं देखा गया कि उन्होंने ऐसा कोई काम किया हो जिसके लिए उन्हें पांच दिन की जेल हो। सीजेपी द्वारा मौजूदा हालात को इमरजेंसी जैसा बताए जाने पर जब मैंने 1975 की इमरजेंसी के बारे में पढ़ा, तो पाया कि उस वक्त की सरकार और प्रधानमंत्री पर भी चुनावों में गड़बड़ी व फर्जीवाड़े का आरोप था और चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे थे। उस समय छात्रों और मजदूरों के बीच जो असंतोष था, वही स्थिति आज भी है जहां युवा सड़कों पर उतरा हुआ है और सोशल मीडिया पर सरकार के खिलाफ अपनी बात मजबूती से रख रहा है।
तिरंगा झंडा फहराने के जुर्म में सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी बेहद हास्यास्पद
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि आज देश में 1975 जैसी ही आर्थिक और राजनीतिक अस्थिरता है। वैश्विक स्तर पर देश के हालात बहुत खराब हैं। ट्रंप रोज हमारे देश को गाली देते हैं और चीन लद्दाख पर अपना दावा जता रहा है, लेकिन प्रधानमंत्री चुप और डरे हुए बैठे हैं। विदेशों में डंका बजने और इज्जत बढ़ने की प्रधानमंत्री की जो नकली छवि बनी थी, वह अब चूर-चूर हो गई है। लोग कह रहे हैं कि उनके बस की बात यह भी नहीं है कि वे ट्रंप को जवाब दे सकें। राजनीतिक मोर्चे पर भाजपा के अंदर महाभारत चल रही है। प्रधानमंत्री पद के लिए योगी आदित्यनाथ और अमित शाह के बीच झगड़ा है। 75 साल की उम्र होने के बावजूद प्रधानमंत्री का उत्तराधिकारी तय नहीं हो पा रहा है। किसी मजबूत व्यक्ति को अध्यक्ष न बना पाने की मजबूरी के कारण भाजपा को एक बेहद साधारण व्यक्ति को अपना राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाना पड़ा है।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि आज ठीक वही स्थिति बन गई है जो 1975 में इमरजेंसी के समय थी। जिस तरह उस समय राज नारायण, मोरारजी देसाई और बड़े नेताओं को गिरफ्तार किया गया था, उसी तरह आज भी गिरफ्तारियों की शुरुआत हो गई है। संघ और भाजपा का पिछले 50 सालों से नैरेटिव इमरजेंसी के खिलाफ रहा है, इसलिए वे इमरजेंसी शब्द से डरते हैं और हो सकता है कि आधिकारिक तौर पर सरकार इमरजेंसी न लगाए। लेकिन बिना इमरजेंसी लगाए ही अब ये बड़े-बड़े नेताओं को गिरफ्तार करना शुरू करेंगे। कोई भी पार्टी या नेता यह न सोचे कि उसका नंबर नहीं आएगा, अब सबका नंबर आएगा।



