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भारत विद्युत शिखर सम्मेलन 2026 का समापन मजबूत वैश्विक भागीदारी, ठोस परिणामों तथा लचीले, भविष्य के लिए तैयार विद्युत क्षेत्र रोडमैप के साथ हुआ

भारत विद्युत शिखर सम्मेलन (बीईएस) के पहले संस्करण का आज सफलतापूर्वक समापन हुआ, जिसमें नीति निर्माताओं, वैश्विक विशेषज्ञों, उद्योगपतियों, निवेशकों एवं नवप्रवर्तकों को

भारत विद्युत शिखर सम्मेलन (बीईएस) के पहले संस्करण का आज सफलतापूर्वक समापन हुआ, जिसमें नीति निर्माताओं, वैश्विक विशेषज्ञों, उद्योगपतियों, निवेशकों एवं नवप्रवर्तकों को विद्युत क्षेत्र के भविष्य पर विचार-विमर्श करने तथा वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को गति प्रदान करने के लिए एक मंच पर लाया गया। सम्मेलन में व्यापक चर्चा, उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बातचीत और महत्वपूर्ण व्यापारिक संपर्क दिखाई दिया, जिससे वैश्विक ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र में भारत की नेतृत्व क्षमता को मजबूती मिली।

इस शिखर सम्मेलन को असाधारण प्रतिक्रिया प्राप्त हुई, जिसमें 35,000 से अधिक प्रदर्शनी प्रतिभागी, 28 राज्य/केंद्र शासित प्रदेश, 80 से अधिक स्टार्टअप सहित 200 से अधिक प्रदर्शनी कंपनियां, 6,000 से अधिक प्रतिनिधि, 300 से अधिक वक्ता और 100 से अधिक सम्मेलन सत्र शामिल थे, जो इसके स्तर एवं वैश्विक महत्व को दर्शाते हैं।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण से प्रेरणा लेते हुए, भारत 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता प्राप्त करने की दिशा में तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है और पहले ही 50 प्रतिशत से अधिक गैर-जीवाश्म क्षमता का महत्वपूर्ण पड़ाव पार कर चुका है। ‘एक सूर्य, एक विश्व, एक ग्रिड’ जैसी पहलें वैश्विक ऊर्जा सहयोग के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को और भी ज्यादा स्पष्ट करती हैं।

अपने समापन भाषण में, केंद्रीय विद्युत मंत्री श्री मनोहर लाल ने कहा कि शिखर सम्मेलन बहुत सफल रहा और इसमें विद्युत क्षेत्र के विभिन्न हितधारकों की प्रभावशाली भागीदारी देखी गई। पहला विद्युत शिखर सम्मेलन होने के बावजूद, इसमें अभूतपूर्व भागीदारी एवं सार्थक चर्चाएं देखने को मिलीं। उन्होंने कहा कि वह विशेष रूप से शिखर सम्मेलन में स्टार्टअप्स की भागीदारी और इस क्षेत्र में उनके द्वारा लाए गए नवाचारों से बहुत प्रसन्न हैं।

उन्होंने कहा कि भारत के पास 2047 तक विकसित भारत के लिए एक दृष्टिकोण है और इस दृष्टिकोण की प्राप्ति के लिए, विद्युत एक सामान्य संसाधन है जिसकी आवश्यकता सभी आर्थिक हितधारकों एवं नागरिकों को है। उन्होंने कहा कि ‘सौभाग्य योजना’ के अंतर्गत हम इसमें सफल रहे कि देश के हर कोने तक विद्युत पहुंच गई।

सौर ऊर्जा और देशों के बीच सहयोग के महत्व पर बल देते हुए, श्री खट्टर ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शब्दों का उल्लेख किया जो ‘एक सूर्य, एक विश्व, एक ग्रिड’ है। उन्होंने कहा कि ये शब्द दर्शाते हैं कि हमें एक वैश्विक परिवार के रूप में एक साथ मिलकर काम करने की आवश्यकता है। हमारा ध्यान स्थिरता पर होना चाहिए और इसलिए नवीनीकरणीय ऊर्जा सहित सौर ऊर्जा का विस्तार बहुत महत्वपूर्ण है।

 

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