
जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (डीडीडब्ल्यूएस) ने जल जीवन मिशन (जेजेएम) 2.0 के परिचालन दिशानिर्देश जारी किए। यह घोषणा विश्व जल दिवस के अवसर पर आयोजित जल महोत्सव 2026 और सुजल ग्राम संवाद के समापन के उपलक्ष्य में की गई। जल महोत्सव 2026 को 8 मार्च (अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस) से 22 मार्च (विश्व जल दिवस) तक 15 दिनों के राष्ट्रव्यापी अभियान के रूप में मनाया गया। इस अभियान में व्यापक सामुदायिक भागीदारी रही और देशभर की ग्राम पंचायतों को पेयजल संसाधन उपलब्ध कराने के लिए जल अर्पण किया गया।
समापन समारोह में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी.आर. पाटिल और जल शक्ति राज्य मंत्री श्री वी. सोमन्ना ने विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ वर्चुअल माध्यम से भाग लेकर शोभा बढ़ाई। इस अवसर पर जल महोत्सव 2026 पर एक वीडियो जारी किया गया, जिसमें अभियान के दौरान प्रमुख गतिविधियों और प्रख्यात नेताओं द्वारा दिए गए संदेशों को प्रदर्शित किया गया। केंद्रीय मंत्री द्वारा जल जीवन मिशन 2.0 के परिचालन दिशानिर्देशों का ई-प्रकाशन, ग्रामीण पेयजल प्रणालियों के संरचनात्मक सुधारों और दीर्घकालिक स्थिरता पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित करते हुए, जल जीवन मिशन को दिसंबर 2028 तक विस्तारित करना कैबिनेट की मंजूरी के बाद एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
सभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा, जल जीवन मिशन केवल नल कनेक्शन उपलब्ध कराने की योजना नहीं है, बल्कि एक ऐसा मिशन है जिसने ग्रामीण भारत में विशेषकर महिलाओं और बच्चों के जीवन को गरिमा, स्वास्थ्य और सुगम जीवन सुनिश्चित करके रूपांतरित किया है। जल जीवन मिशन के पहले चरण में बुनियादी ढांचे का तेजी से विस्तार हुआ, लेकिन जमीनी अनुभव से स्पष्ट है कि अब स्थिरता, कार्यक्षमता और सेवा वितरण पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से सरकार ने जल जीवन मिशन 2.0 को मंजूरी दी है और मिशन को दिसंबर 2028 तक बढ़ा दिया है, जिसमें संरचनात्मक सुधारों और जवाबदेही पर नए सिरे से जोर दिया गया है , ताकि ग्रामीण परिवारों को दीर्घकालिक आधार पर नियमित, पर्याप्त और सुरक्षित पेयजल प्राप्त हो सके।
केंद्रीय मंत्री श्री पाटिल ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री ने जल संचय से जन भागीदारी को मजबूत करने के लिए जल उत्सव और नदी उत्सव जैसी पहलों को पूरे देश में मनाने की सलाह दी है, ताकि जल संरक्षण और जल प्रबंधन केवल सरकार द्वारा संचालित अभ्यास के बजाय जन-नेतृत्व वाला आंदोलन बन सके। उन्होंने कहा कि 8 से 22 मार्च तक मनाया गया जल महोत्सव 2026 इस दृष्टिकोण को प्रभावी ढंग से क्रियान्वित करने में सफल रहा है, जिसमें ग्रामीण भारत भर में व्यापक सामुदायिक भागीदारी, जागरूकता गतिविधियां और जल संरक्षण और सतत जल प्रबंधन की दिशा में सामूहिक प्रयास देखने को मिले हैं।
उन्होंने कहा कि सामुदायिक स्वामित्व, जवाबदेही और दीर्घकालिक स्थिरता को मजबूत करने के व्यापक संदर्भ में ही सरकार ने जल जीवन मिशन 2.0 को मंजूरी दी है, और संरचनात्मक सुधारों और शासन व्यवस्था में सुधार पर नए सिरे से जोर देते हुए मिशन को दिसंबर 2028 तक बढ़ा दिया है। केंद्रीय मंत्री ने रेखांकित किया कि जल जीवन मिशन 2.0 का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ग्रामीण परिवारों को दीर्घकालिक आधार पर नियमित, पर्याप्त और सुरक्षित पेयजल मिले, और इसके लिए बुनियादी ढांचे के निर्माण के दृष्टिकोण से हटकर सेवा वितरण उन्मुख मॉडल की ओर निर्णायक रूप से आगे बढ़ा जाए।
सुधार संबंधी समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर बोलते हुए, केंद्रीय मंत्री ने बताया कि जल जीवन मिशन 2.0 के तहत परिकल्पित संरचनात्मक सुधारों के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए राज्यों के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जल महोत्सव 2026 के दौरान अब तक नौ राज्यों ने समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं, जिससे ग्राम स्तर पर स्थायी पेयजल सेवाएं प्रदान करने की उनकी प्रतिबद्धता की पुष्टि होती है। उन्होंने आगे जोर दिया कि राज्यों, जिलों और ग्राम पंचायतों को अब इन सुधारों को जमीनी स्तर पर ठोस परिणामों में बदलने के लिए निकट समन्वय में काम करना होगा।



