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सफाई कर्मचारी से लेकर मशीनों का उपयोग कर पेशेवर सफाई करने वाले उद्यमी तक: नमस्ते-सूय योजना ने हिमांशु को सुरक्षा और सम्मान से आजीविका अर्जित करने में सक्षम बनाया

सफाई कर्मचारी से लेकर मशीनों का उपयोग कर पेशेवर सफाई करने वाले उद्यमी तक: नमस्ते-सूय योजना ने हिमांशु को सुरक्षा और सम्मान से आजीविका अर्जित करने में सक्षम बनाया

समय पर प्रदान की गई वित्तीय सहायता और मशीनी उपकरणों तक पहुंच सफाई कर्मचारियों को असुरक्षित कार्यों से दूर जाने, स्वरोजगार अपनाने और गरिमापूर्ण ढंग से सुरक्षित आजीविका अर्जित करने में सक्षम बना सकती है।

ओबीसी लोहार समुदाय से ताल्लुक रखने वाले 25 वर्षीय स्नातक हिमांशु ने नमस्ते योजना की स्वच्छता उद्यमी योजना (एसयूवाई) के घटक के तहत मिली सहायता के माध्यम से इस बदलाव का अनुभव किया। गाजियाबाद के ग्राम नंदग्राम, मरियम नगर के निवासी हिमांशु अब स्वतंत्र रूप से ट्रैक्टर-कम-सक्शन मशीन चलाते हैं और आसपास के क्षेत्रों में मशीनों से स्वच्छता सेवाएं प्रदान करते हैं।

हिमांशु ऐसे परिवार में पले-बढ़े, जहां आर्थिक कठिनाइयां रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा थीं। उनके पिता दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम करते थे और परिवार को अक्सर बुनियादी जरूरतें पूरी करने के लिए संघर्ष करना पड़ता था। सबसे बड़े बेटे होने के नाते हिमांशु ने कम उम्र में ही अपने माता-पिता और छोटे भाई-बहनों की जिम्मेदारी संभाल ली। कठिन आर्थिक परिस्थितियों ने उन्हें अपने अधिक सुरक्षित भविष्य के सपनों को पूरा करने के साथ-साथ काम शुरू करने के लिए मजबूर किया।

उन्होंने स्थानीय ठेकेदारों के अधीन स्वच्छता संबंधी कार्य शुरू किया, जिसमें कठिन और जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में सीवर एवं सेप्टिक टैंक की सफाई करना शामिल था। इस कार्य में शारीरिक थकान, अनियमित मजदूरी और ठेकेदारों पर निर्भरता जैसी चुनौतियां थीं। इस पेशे से जुड़ा सामाजिक कलंक भी उनके आत्मविश्वास और गरिमा को प्रभावित करता था, जबकि वित्तीय संसाधनों के अभाव में वे स्वतंत्र रूप से अपना काम शुरू करने में सक्षम नहीं थे।

इन चुनौतियों के बावजूद, हिमांशु स्वरोजगार अपनाने और असुरक्षित मैनुअल श्रम जारी रखने के बजाय आधुनिक स्वच्छता उपकरण चलाने के लिए प्रतिबद्ध रहे। वे अपने लिए आर्थिक स्थिरता और सामाजिक सम्मान के साथ-साथ अपने परिवार के लिए सुरक्षित भविष्य चाहते थे। उनका मानना था कि यदि सफाई कर्मचारियों को उचित सहायता और अवसर प्रदान किए जाएं, तो वे स्वतंत्र उद्यमी बन सकते हैं।

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