
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने आज नई दिल्ली में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) द्वारा आयोजित वैश्विक बाघ दिवस 2026 समारोह को संबोधित किया। श्री यादव ने प्रकृति के साथ गहरे सामाजिक जुड़ाव और संरक्षण-उन्मुख जीवनशैली अपनाने का आह्वान किया। इस कार्यक्रम में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री श्री कीर्ति वर्धन सिंह के अलावा वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, वन्यजीव विशेषज्ञ, वन विभाग के कर्मचारी, छात्र और अन्य हितधारक उपस्थित थे। इस अवसर पर बाघ संरक्षण में भारत की उपलब्धियों का उल्लेख किया गया और बाघों एवं उनके आवासों की रक्षा के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता दोहराई गई।
श्री यादव ने कहा कि संरक्षण का अर्थ केवल वन्यजीवों की रक्षा करना ही नहीं है, बल्कि प्रकृति के साथ सम्मानजनक संबंध विकसित करना भी है। उन्होंने कहा, “प्रकृति केवल पर्यटन या मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि इसका सम्मान किया जाना चाहिए और लोगों को इससे शांति प्राप्त करनी चाहिए।” उन्होंने लोगों को प्रकृति से प्रेरणा लेने और पर्यावरण संरक्षण के प्रति समर्पित जीवन शैली अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया।
श्री यादव ने प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत की संरक्षण संबंधी उपलब्धियों पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में बाघों (3682) और बाघ अभ्यारण्यों (58) की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में हाथी अभ्यारण्यों, राष्ट्रीय उद्यानों, वन्यजीव अभ्यारण्यों, संरक्षित क्षेत्रों, सामुदायिक अभ्यारण्यों और आर्द्रभूमि की संख्या में भी वृद्धि हुई है।
श्री यादव ने एनटीसीए के पर्यावरण-पर्यटन वेबपेज का शुभारंभ करते हुए सभी बाघ अभ्यारण्यों से संबंधित जानकारी को एक एकीकृत मंच पर लाने के लिए एनटीसीए को बधाई दी। यह सफारी और आवास बुकिंग के लिए सभी बाघ अभ्यारण्यों की प्रामाणिक वेबसाइटों के सीधे लिंक प्रदान करता है। इससे जानकारी अधिक सुलभ हो जाती है और साथ ही जिम्मेदार और टिकाऊ प्रकृति-आधारित पर्यटन को बढ़ावा मिलता है।
संरक्षण अनुभवों के दस्तावेजीकरण के महत्व का उल्लेख करते हुए श्री यादव ने कहा कि वनों की कहानियां केवल आंकड़े नहीं हैं, बल्कि इनमें पारंपरिक ज्ञान, भावनाएं, वन्यजीव संरक्षण के प्रति जुनून और वन्यजीव अधिकारियों, संरक्षणवादियों आदि के वर्षों के अनुभव शामिल हैं। उन्होंने वन अधिकारियों से वन्यजीव संरक्षण के बारे में अधिक लिखने और अपने अनुभवों को इस तरह साझा करने का आग्रह किया जिससे व्यावहारिक और लागू करने योग्य नीतिगत समाधानों में योगदान मिल सके।
श्री यादव ने वैश्विक सर्वोत्तम कार्य प्रणालियों को शामिल करते हुए वन अधिकारियों और कर्मचारियों की क्षमता निर्माण की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में ज्ञान साझाकरण को विश्व स्तर पर ले जाने में अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट एलायंस (आईबीसीए) की भूमिका पर प्रकाश डाला।
बाघ संरक्षण के लिए जमीनी स्तर पर काम करने वालों के योगदान की सराहना करते हुए एनटीसीए पुरस्कार वन्यजीव अधिकारियों और अन्य योगदानकर्ताओं को बाघ संरक्षण और संरक्षित क्षेत्र प्रबंधन में उनके अनुकरणीय कार्य के लिए प्रदान किए गए। समारोह में उन अग्रिम पंक्ति के कर्मियों के योगदान को भी सम्मानित किया गया, जिनके प्रयास वन्यजीव संरक्षण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
श्री यादव ने दिल्ली-एनसीआर के स्कूली बच्चों के लिए ‘बाघ बचाओ’ विषय पर आयोजित चित्रकला, रेखाचित्र, नारा लेखन और मुखौटा बनाने की प्रतियोगिताओं में सर्वश्रेष्ठ प्रविष्टियों की प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। इसके अलावा, मंत्रालय के पर्यावरण शिक्षा कार्यक्रम के तहत इको-क्लबों के माध्यम से एक राष्ट्रव्यापी बाघ संरक्षण जागरूकता अभियान भी चलाया गया, जिसमें बाघ अभ्यारण्यों के निकट स्थित विद्यालयों पर विशेष ध्यान दिया गया।
समारोह के दौरान पांच रिपोर्ट जारी की गईं, जो विज्ञान आधारित संरक्षण, ज्ञान साझाकरण और जन जागरूकता पर एनटीसीए के निरंतर जोर को दर्शाती हैं। इनमें एनटीसीए आउटरीच जर्नल – स्ट्राइप्स का जुलाई 2026 संस्करण; 24 बाघ अभ्यारण्यों की सुरक्षा लेखापरीक्षा रिपोर्ट; भारत में बाघ अभ्यारण्यों में रीछों के लिए आवास उपयुक्तता मूल्यांकन पर एक रिपोर्ट; आईबीसीए और जीटीएफ द्वारा प्रकाशित ‘टाइगर्स ऑफ द वर्ल्ड’; और श्री चंद्र प्रकाश गोयल तथा श्री सत्य प्रकाश यादव द्वारा लिखित ‘द रहमान खेड़ा टाइगर’ शामिल हैं।
वैश्विक बाघ दिवस 2026 समारोह ने उत्कृष्टता की सराहना, वैज्ञानिक प्रबंधन, क्षमता निर्माण, जिम्मेदार पर्यावरण पर्यटन, ज्ञान साझाकरण और देश की समृद्ध प्राकृतिक विरासत की रक्षा में अधिक सार्वजनिक भागीदारी के माध्यम से बाघ संरक्षण के प्रति भारत की अटूट प्रतिबद्धता की पुष्टि की।
एक शताब्दी पूर्व, एशिया भर में अनुमानित 10 लाख जंगली बाघ विचरण करते थे। आज, वे अपने ऐतिहासिक क्षेत्र के 8 प्रतिशत से भी कम हिस्से में पाए जाते हैं। तीन उप-प्रजातियां—बाली, जावन और कैस्पियन बाघ—विलुप्त हो चुकी हैं। बाघों की आबादी में गिरावट के प्रमुख कारण अवैध शिकार, वन्यजीवों का अवैध व्यापार, आवास का क्षरण और विखंडन, मानव-वन्यजीव संघर्ष तथा जलवायु परिवर्तन हैं।
सामूहिक कार्रवाई की तत्काल आवश्यकता को पहचानते हुए, 13 बाघ रेंज देशों के नेता 2010 में सेंट पीटर्सबर्ग बाघ शिखर सम्मेलन में एक साथ आए और वैश्विक बाघ पुनर्प्राप्ति कार्यक्रम (जीटीआरपी) की शुरुआत की। इस शिखर सम्मेलन में वैश्विक बाघ दिवस की भी स्थापना की गई और इसका लक्ष्य 2022 तक वैश्विक जंगली बाघों की आबादी को दोगुना करना निर्धारित किया गया । साथ ही, इसे प्रतिवर्ष 29 जुलाई को मनाने का भी लक्ष्य रखा गया।
तब से, वैश्विक बाघ दिवस बाघ संरक्षण के बारे में जागरूकता बढ़ाने, अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने, सार्वजनिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने और बाघों एवं उनके आवासों की रक्षा में हुई प्रगति की समीक्षा करने के लिए एक वैश्विक मंच के रूप में कार्य कर रहा है।



