
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा के एक गेस्ट टीचर के छह साल के बेटे को केंद्रीय विद्यालय में दाखिला देने के मामले में एक अहम फ़ैसला सुनाते हुए संबंधित अधिकारियों को आवेदन पर फिर से विचार करने का आदेश दिया है।
कोर्ट ने कहा कि हरियाणा गेस्ट टीचर्स सर्विस एक्ट, 2019 के तहत गेस्ट टीचर्स की सर्विस की शर्तें रेगुलर हैं और उन्हें सिर्फ़ इसलिए रेगुलर सरकारी कर्मचारियों से अलग नहीं माना जा सकता क्योंकि वे गेस्ट टीचर्स हैं। जस्टिस कुलदीप तिवारी ने नूह के छह साल के छात्र आशुतोष की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।
यह याचिका बच्चे की माँ और कानूनी अभिभावक ने दायर की थी। बच्चे ने केंद्रीय विद्यालय, नूह में पहली कक्षा में एडमिशन के लिए अप्लाई किया था, लेकिन उसका एप्लीकेशन इस आधार पर रिजेक्ट कर दिया गया कि उसकी माँ रेगुलर राज्य सरकारी कर्मचारी नहीं थीं।
याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि बच्चे की माँ 2007 से हरियाणा के शिक्षा विभाग में गेस्ट प्राइमरी टीचर के तौर पर काम कर रही हैं और अभी GPS गांडबास में JBT गेस्ट टीचर के मंज़ूर पद पर काम कर रही हैं।
‘हरियाणा गेस्ट टीचर्स सर्विस एक्ट, 2019’ का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने गेस्ट टीचरों की सर्विस की शर्तों को कानूनी मान्यता दी है और उन्हें 58 साल की उम्र तक काम करने का अधिकार है।



