
नई दिल्ली : आम आदमी पार्टी पंजाब में अकाली दल के ताकतवर नेता बिक्रम सिंह मजीठिया के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल होने पर सीएम भगवंत मान के हिम्मत की तारीफ की है। पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा कि मजीठिया पर चार्जशीट दाखिलाफ होने से साफ है कि सीएम भगवंत मान ही पंजाब को नशा मुक्त बना सकते हैं। क्योंकि पंजाब के साथ केंद्र में भी कांग्रेस की सरकार रही और 2014 से मोदी जी की सरकार है, लेकिन किसी में भी मजीठिया पर कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं हुई। उन्होंने कहा कि बिक्रम मजीठिया को अपना पोस्टर बॉय बनाकर भाजपा पंजाब से कैसे नशा और भ्रष्टज्ञचार कम करेगी? उन्होंने यह भी पूछा कि मजीठिया पर एफआईआर होने के इतने साल बाद भी मोदी जी की ईडी कहां सो रही है?
बुधवार को “आप” मुख्यालय पर प्रेस वार्ता कर सौरभ भारद्वाज ने कहा कि पंजाब में 2007 से 2017 तक 10 साल अकाली दल की सरकार रही। उस वक्त पंजाब में ड्रग्स बिकना चरम पर पहुंच गया था। पंजाब को ड्रग्स के अंधे कुएं में झोंकने का श्रेय उसी समय को जाता है। पंजाब के मुख्यमंत्री के रिश्तेदार और एक पावरफुल मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया के ड्रग्स कारोबारियों के साथ कनेक्शन थे। पंजाब में पांच साल कांग्रेस की सरकार रही और जब अकालियों की सरकार थी, तब भी लंबे अरसे तक केंद्र में कांग्रेस की सरकार रही। 2014 से केंद्र में लगातार भाजपा की सरकार है, मगर किसी सरकार की हिम्मत नहीं हुई कि वह बिक्रम सिंह मजीठिया के ऊपर कोई ठोस कानूनी कार्रवाई कर सके। उन पर ठोस कानूनी कार्रवाई करने का श्रेय सिर्फ सरदार भगवंत मान को जाता है। पंजाब सरकार के विजिलेंस ब्यूरो ने करीब 40,000 पन्नों की एक मजबूत चार्जशीट बिक्रम सिंह मजीठिया, उनसे जुड़ी कंपनियों और कई अन्य कंपनियों के खिलाफ दाखिल की है।
सौरभ भारद्वाज ने बताया कि बिक्रम सिंह मजीठिया जब पहली बार विधायक और फिर मंत्री बने, तो उनके और उनकी पत्नी के पास 1 करोड़ 40 लाख रुपए की संपत्ति थी। लोग कहते थे कि वे बड़े राजे-रजवाड़े थे, लेकिन संपत्ति सिर्फ 1 करोड़ 40 लाख रुपए थी। 2007 से 2017 के दौरान इनकी संपत्ति में 1500 फीसद की बढ़ोतरी हुई, जिसे आय से अधिक संपत्ति कहते हैं। इसके अलावा 686 करोड़ रुपए की अवैध एनरिचमेंट का मुकदमा बना है। 50 करोड़ रुपए की आय से अधिक संपत्ति और 686 करोड़ रुपए की अवैध एनरिचमेंट मिलाकर करीब 736 करोड़ रुपए की गड़बड़ी का मामला बनता है। विजिलेंस डिपार्टमेंट ने मोहाली कोर्ट में चार्जशीट दायर कर दी है। यह वही मामला है जिसमें बिक्रम सिंह मजीठिया करीब 7 महीने पुलिस और ज्यूडिशियल कस्टडी में रहे थे और उन्हें भगवंत मान की सरकार के दौरान ही कस्टडी में भेजा गया था, वरना उससे पहले किसी सरकार की हिम्मत नहीं हुई थी।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि बिक्रम सिंह मजीठिया अकाली दल के नेता हैं, लेकिन वे भाजपा के पोस्टर बॉय हैं। ईडी या सीबीआई की सारी अंदरूनी कार्रवाई की जानकारी सबसे पहले उन्हें होती है, जैसे वे केंद्र सरकार में एडवाइजर लगे हुए हों। इतने खास रिश्ते वाले आदमी पर इतनी बड़ी चार्जशीट होना केंद्र सरकार के लिए शर्म की बात है। उनकी ईडी कहां है और नशे को लेकर उनकी क्या तत्परता है? एफआईआर दर्ज हुए इतने साल हो गए, लेकिन अब तक बिक्रम सिंह मजीठिया पर ईडी की जांच नहीं बैठी। शराब का काम करने वाली सराया इंडस्ट्रीज लिमिटेड मजीठिया परिवार की कंपनी है, जिसमें वे पहले डायरेक्टर थे। जब वे 2007 में मंत्री बने, तो 2007 से 2009 के बीच मात्र 2 साल में इस कंपनी के अंदर करीब 170 करोड़ रुपए का अनअकाउंटेड कैश आया, जिसे कोई एक्सप्लेन नहीं कर पाया। फिर जब वे 2012 से 2014 के बीच दोबारा मंत्री बने, तो इस कंपनी में करीब 128 करोड़ रुपए के अनएक्सप्लेंड सरप्लस फंड आए।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि इसके अलावा बहुत सारी विदेशी कंपनियां हैं, जिनमें साइप्रस में बनी क्लियर वाटर कंपनी भी बताई जाती है। इन कई कंपनियों के जाल में घालमेल करके करीब 176 करोड़ रुपए घुमाए गए। मसलन, एक साइप्रस बेस्ड कंपनी से 90 करोड़ रुपए का लोन ले लिया, उस पर ब्याज बढ़कर 150 करोड़ रुपए हो गया और फिर उसे 20-21 करोड़ रुपए में सेटल कर दिया गया। इसी तरह अलग-अलग कंपनियों के बहाने 176 करोड़ रुपए अपनी और जुड़ी हुई कंपनियों में आए, जिन पर इन्वेस्टिगेशन और चार्जशीट हुई है। सराया इंडस्ट्रीज लिमिटेड में इस दौरान करीब 194 करोड़ रुपए के अनएक्सप्लेंड फिजिकल एसेट भी बढ़े हैं।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि भाजपा की केंद्र सरकार बिक्रम सिंह मजीठिया की इस चार्जशीट पर जवाब दे। बिक्रम सिंह मजीठिया जैसे आदमी को पोस्टर बॉय बनाकर भाजपा कैसे नशा और भ्रष्टाचार कम करेगी? अब तक ईडी कहां सो रही है? जबकि एफआईआर दर्ज होते ही ईडी तुरंत ईसीआईआर दर्ज करके सब में घुस जाती है। इसका मतलब है कि केंद्र की भाजपा सरकार और बिक्रम सिंह मजीठिया की इन सब मामलों में सीधी मिलीभगत है।



