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भारत सरकार ने चंडीगढ़ और दादरा एवं नगर हवेली में पीएमजीकेएवाई के अंतर्गत सीबीडीसी आधारित प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीएलडीसी) योजना शुरू की

केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि सीबीडीसी आधारित डीबीटी विश्व के सबसे बड़े खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम के डिजिटलीकरण में एक महत्वपूर्ण कदम है

भारत सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) के तहत चंडीगढ़ और दादरा एवं नगर हवेली के केंद्र शासित प्रदेशों में केंद्रीय बैंक डिजिटल करेंसी (सीबीडीसी) आधारित प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) कार्यक्रम शुरू किया है। माननीय केंद्रीय शिक्षा, उपभोक्ता कार्य, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण एवं नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी ने पंजाब के माननीय राज्यपाल और चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासक श्री गुलाब चंद कटारिया तथा माननीय केंद्रीय ग्रामीण विकास, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के साथ मिलकर इस कार्यक्रम का उद्घाटन किया।

नई प्रणाली के अंतर्गत खाद्य सब्सिडी लाभार्थी के  बैंक खाते के बजाय सीधे उनके डिजिटल रुपी वॉलेट में हस्तांतरित की जाएगी । लाभार्थी इस विशेष उद्देश्य के लिए दी गई डिजिटल सब्सिडी का उपयोग सूचीबद्ध व्यापारियों से सुरक्षित और ट्रैक करने योग्य डिजिटल भुगतान प्रणाली के माध्यम से खाद्यान्न खरीदने के लिए कर सकते हैं।

यह योजना निम्नलिखित सुविधाएं प्रदान करता है:

  • खाद्य सब्सिडी का तत्काल हस्तांतरण ।
  • खाद्यान्नों पर दी जाने वाली सब्सिडी का उद्देश्य-आधारित उपयोग ।
  • लेन-देन का बेहतर अनुरेखण सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल अभिलेख।
  • नकदी निकालने और नकदी संभालने पर निर्भरता में कमी ।
  • सब्सिडी के उपयोग में अधिक पारदर्शिता और निगरानी। और
  • व्यापारियों के लिए डिजिटल भुगतान को और भी आसान बनाना।

इस सिस्टम को सुलभता बढ़ाने के लिए भी डिज़ाइन किया गया है। स्मार्टफोन उपयोगकर्ता क्यूआर कोड के माध्यम से भुगतान कर सकते हैं जबकि फीचर फोन उपयोगकर्ता ओटीपी-आधारित तरीकों से इस सुविधा का लाभ उठा सकते हैं।

इस अवसर पर श्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि आज विश्व के सबसे बड़े खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम के डिजिटलीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य पात्र लाभार्थियों को वंचित न करना और उचित लक्ष्यीकरण सुनिश्चित करना है ताकि मुफ्त राशन केवल उन्हीं तक पहुंचे जो इसके हकदार हैं जो “हर दाना, हर रुपया, हर अधिकार ” की भावना के अनुरूप। उन्होंने कहा कि इसका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक रुपया  लाभार्थी तक पहुंचे, बिचौलियों को व्यवस्था से बाहर रखा जाए और यह पहल डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के व्यापक ढांचे के साथ पूरी तरह से संरेखित है।

उन्होंने  कहा कि डीबीटी  से भ्रष्टाचार कम हुआ है और लाभार्थियों तक सीधे लाभ का हस्तांतरण सुनिश्चित हुआ है जिससे 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बचत हुई है। उन्होंने एआई समाधान ‘आशा’ का भी उल्लेख किया जिसके अंतर्गत खाद्यान्न की गुणवत्ता और लाभार्थियों को उनके हक के अनुसार मिल रहे लाभ के बारे में प्रतिक्रिया प्राप्त करने के लिए लाभार्थियों को 20 लाख कॉल किए जाते हैं और शिकायतों/प्रतिक्रिया को तार्किक समाधान के लिए राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को भेजा जाता है। ये सुधार प्रधानमंत्री के पारदर्शी, प्रौद्योगिकी-आधारित और मध्यस्थ-मुक्त शासन के दृष्टिकोण को दर्शाते हैं जहां सार्वजनिक व्यय का प्रत्येक रुपया अपने इच्छित उद्देश्य के लिए निर्देशित होता है और प्रत्येक पात्र लाभार्थी को उसके हक के लाभ प्राप्त करने का अधिकार मिलता है। उन्होंने कहा कि सीबीडीसी आधारित पहल डिजिटल वॉलेट में धनराशि जमा करने और सूचीबद्ध दुकानों पर इसका उपयोग करने की सुविधा प्रदान करके इस दिशा में आगे बढ़ेगी जिसमें स्मार्टफोन उपयोगकर्ता क्यूआर कोड स्कैन कर सकेंगे और फीचर फोन उपयोगकर्ता ओटीपी आधारित पहुंच का उपयोग कर सकेंगे।

इस अवसर पर  पंजाब के माननीय राज्यपाल और चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासक श्री गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि सीबीडीसी की शुरुआत से गरीब और वंचित लाभार्थियों को मिलने वाले सम्मान और गरिमा को और मजबूती मिली है और साथ ही अधिक पारदर्शी और कुशल प्रणाली के माध्यम से व्यापारियों को भी लाभ हुआ है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीसी) के डिजिटलीकरण से हेराफेरी और गबन की संभावना कम हो गई है जिससे यह सुनिश्चित होता है कि लाभ सही लाभार्थियों तक पहुंचे। उन्होंने आगे कहा कि विभिन्न सरकारी कल्याण और विकास योजनाओं के संयुक्त प्रभाव से गरीबी में व्यापक कमी आई है साथ ही इस बात पर जोर दिया कि यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि लाभ केवल उन्हीं लोगों तक पहुंचे जो वास्तव में इसके हकदार हैं।

केंद्रीय ग्रामीण विकास, कृषि और किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि खाद्य सुरक्षा सरकार की पहली प्राथमिकता बनी हुई है।

उन्होंने भारत में खाद्यान्न की बेहतर उपलब्धता का उल्लेख किया और कहा कि देश में अब घरेलू जरूरतों को पूरा करने और आवश्यकता पड़ने पर खाद्यान्न निर्यात करने के लिए पर्याप्त भंडार मौजूद है। श्री चौहान ने कहा कि सीबीडीसी की कार्यक्रमबद्ध प्रकृति खाद्य सब्सिडी के दुरुपयोग को रोकने और यह सुनिश्चित करने में सहायक होगी कि लाभ इच्छित लाभार्थियों तक पहुंचे। उन्होंने सुझाव दिया कि इस पहल को देश के अन्य हिस्सों में भी विस्तारित किया जाए ताकि अधिक लाभार्थी इस सुधार से लाभान्वित हो सकें।

इस पहल के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री श्रीमती निमुबेन जयंतीभाई बंभानिया ने कहा कि विभाग ने वर्षों से कई महत्वपूर्ण सुधार किए हैं, जिनमें वन नेशन वन राशन कार्ड (ओएनओआरसी) के माध्यम से पोर्टेबिलिटी और शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत करना शामिल है ताकि एक अधिक आधुनिक, पारदर्शी और लाभार्थी-केंद्रित सार्वजनिक वितरण प्रणाली का निर्माण किया जा सके। उन्होंने कहा कि आज सरकार विश्व के सबसे बड़े खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम के माध्यम से 8 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को मुफ्त राशन प्रदान कर रही है और कोविड काल के दौरान, इन व्यवस्थाओं ने यह सुनिश्चित किया कि कोई भी गरीब व्यक्ति भूखा न सोए। उन्होंने आगे कहा कि सरकार के प्रयासों से 25 करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी से बाहर निकलने में मदद मिली है और ओएनओआरसी  ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली को अधिक आधुनिक और पारदर्शी बनाया है।

खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के सचिव ने इस शुभारंभ के महत्व को समझाते हुए कहा कि सीबीडीसी आधारित डीबीटी, जन धन खाते, आधार और मोबाइल फोन – इन तीन प्रमुख स्तंभों पर आधारित भारत की डिजिटल वित्तीय समावेशन यात्रा में अगला स्वाभाविक कदम है। उन्होंने कहा कि 59 करोड़ से अधिक जन धन खाते खोले जा चुके हैं जिनमें 3.10 लाख करोड़ रुपये से अधिक की जमा राशि है और इसी आधार पर देश ने यूपीआई का निर्माण किया जिसने जुलाई 2026 में 30 लाख करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के 2400 करोड़ से अधिक लेनदेन संसाधित किए और वैश्विक स्तर पर सभी वास्तविक समय के डिजिटल भुगतान लेनदेन का लगभग 49 प्रतिशत हिस्सा था।

इस पहल के साथ चंडीगढ़ और दादरा एवं नगर हवेली देश के पहले ऐसे राज्य/केंद्र शासित प्रदेश बन गए हैं जिन्होंने सभी पात्र पीएमजीकेएवाई लाभार्थियों को प्रोग्रामेबल सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (सीबीडीसी – डिजिटल रुपी) टोकन के रूप में खाद्य सब्सिडी का हस्तांतरण सीधे उनके सीबीडीसी वॉलेट में शुरू कर दिया है। यह पहल गुजरात और पुडुचेरी में पहले किए गए पायलट प्रोजेक्ट पर आधारित है। सीबीडीसी आधारित खाद्य सब्सिडी वितरण पायलट परियोजना सबसे पहले 15 फरवरी 2026 को गुजरात में और उसके बाद 26 फरवरी 2026 को पुडुचेरी में शुरू किया गया था। इन पायलट परियोजना से प्राप्त अनुभव और सीख के आधार पर भारत सरकार ने अब इस पहल को चंडीगढ़ और दादरा एवं नगर हवेली तक विस्तारित कर दिया है।

इस मॉडल के अंतर्गत लाभार्थियों को खाद्य सब्सिडी पारंपरिक बैंक खाते में हस्तांतरण के बजाय सीधे उनके सीबीडीसी वॉलेट में प्राप्त होती है। इस सब्सिडी का उपयोग सूचीबद्ध व्यापारियों से सुरक्षित, ट्रैक करने योग्य और वास्तविक समय की डिजिटल भुगतान प्रणाली के माध्यम से खाद्यान्न खरीदने के लिए किया जा सकता है। यह प्रणाली नकदी के गबन, हेराफेरी और लेन-देन को कम करने के लिए डिज़ाइन की गई है और साथ ही लाभों के त्वरित हस्तांतरण और सब्सिडी के उपयोग की बेहतर निगरानी को सक्षम बनाती है।

यह पहल केंद्र सरकार के कल्याणकारी कार्यक्रमों में सीबीडीसी का पहला व्यापक अनुप्रयोग है। डीबीटी की खूबियों और सीबीडीसी की क्षमताओं को मिलाकर यह मॉडल यह सुनिश्चित करना चाहता है कि सार्वजनिक धन लाभार्थियों तक तुरंत पहुंचे और एक पारदर्शी डिजिटल तंत्र के माध्यम से अपने इच्छित उद्देश्य के लिए उपयोग किया जा सके।

इस परियोजना को राष्ट्र के लिए एक अवधारणा के प्रमाण के रूप में और अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए एक विस्तार योग्य टेम्पलेट के रूप में परिकल्पित किया गया है। इससे कल्याणकारी योजनाओं के साथ सीबीडीसी को एकीकृत करने में उपयोगी परिचालन अनुभव प्राप्त होने की उम्मीद है और यह डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना को मजबूत करने और नवीन प्रौद्योगिकियों के माध्यम से नागरिक-केंद्रित सेवाएं प्रदान करने के सरकार के दृष्टिकोण का समर्थन करेगी।

सीबीडीसी आधारित यह पहल प्रौद्योगिकी-आधारित पीडीएस सुधारों की मजबूत नींव पर टिकी है जिसमें राशन कार्ड और लाभार्थी डेटाबेस का डिजिटलीकरण, आधार-आधारित सत्यापन, ई-पीओएस प्रमाणीकरण, ऑनलाइन आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन और ‘वन नेशन वन राशन कार्ड’ के तहत राष्ट्रव्यापी सुवाह्यता शामिल है। राइटफुल टारगेटिंग, स्मार्ट-पीडीएस, निर्मल, वीएलटीएस और सक्षम जैसी पहलों के साथ, सरकार डेटा-संचालित निगरानी, ​​पारदर्शिता और अंतिम छोर तक वितरण को और मजबूत कर रही है, जिससे अधिक कुशल, जवाबदेह और लाभार्थी-केंद्रित खाद्य वितरण प्रणाली का मार्ग प्रशस्त हो रहा है।

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