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भारत और पनामा ने रसद, डिजिटल नवाचार और वैश्विक संपर्क पर केंद्रित नई समुद्री साझेदारी की रूपरेखा तैयार की

भारत और पनामा ने रसद, डिजिटल नवाचार और वैश्विक संपर्क पर केंद्रित नई समुद्री साझेदारी की रूपरेखा तैयार की

केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री (एमओपीएसडब्ल्यू) सर्बानंद सोनोवाल ने पनामा के विदेश मंत्री जेवियर मार्टिनेज-अचा वास्केज़ के साथ द्विपक्षीय बातचीत की। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच समुद्री सहयोग को और मजबूत करना था। इसके साथ ही दोनों पक्षों ने रसद, पोत परिवहन, समुद्री सुरक्षा, कौशल विकास और डिजिटल बदलाव को एक विस्तारित रणनीतिक साझेदारी के मुख्य स्तंभों के रूप में चिह्नित किया।

केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, “भारत और पनामा स्वाभाविक समुद्री साझेदार हैं। पनामा की रणनीतिक रसद क्षमताओं और भारत की बढ़ती समुद्री क्षमताओं को मिलाकर, हम मजबूत आपूर्ति श्रृंखला बना सकते हैं, वैश्विक संपर्क को बेहतर कर सकते हैं और व्यापार, निवेश, नवाचार और टिकाऊ विकास के लिए नए अवसर पैदा कर सकते हैं। हमारा साझा दृष्टिकोण इस साझेदारी को लैटिन अमेरिका और कैरिबियन के साथ भारत के संबंधों के मुख्य स्तंभों में से एक बनाना है।”

वार्ता में भारत और पनामा के बीच 19वीं सदी से चले आ रहे समुद्री संबंधों को फिर से दोहराया गया और दोनों देशों के संबंधों को मजबूत करने में भारतीय समुदाय के अहम योगदान को भी स्वीकारा गया। भारत के बंदरगाहों को लेकर विश्व में अग्रणी के तौर पर उभरने और पनामा के दुनिया के प्रमुख समुद्री रसद केंद्र में से एक होने के कारण, दोनों देश इस बात पर सहमत हुए कि करीबी सहयोग और बेहतरीन तौर-तरीकों के आदान-प्रदान से पूरे अमेरिका क्षेत्र में व्यापार, संपर्क और निवेश के नए अवसर खुलेंगे।

बैठक के दौरान, मंत्री जेवियर मार्टिनेज-अचा वास्केज़ ने दोनों देशों के बीच समुद्री सहयोग बढ़ाने के लिए चार प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की रूपरेखा का ज़िक्र किया: समुद्री सुरक्षा, भारत के जहाजरानी महानिदेशालय और पनामा समुद्री प्राधिकरण के बीच तकनीकी सहयोग, समुद्री शिक्षा और कौशल विकास और डिजिटल समुद्री बदलाव में भविष्य-उन्मुख सहयोग, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्मार्ट पोर्ट लॉजिस्टिक्स और समुद्री सिंगल-विंडो प्रणाली शामिल हैं।

केंद्रीय मंत्री सोनोवाल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में बंदरगाहों, शिपिंग, इनलैंड वॉटरवे, रसद, जहाज निर्माण, क्रूज़ पर्यटन और हरित समुद्री पहलों में लगातार निवेश के ज़रिए भारत में हो रहे तेज़ी से बदलाव पर ज़ोर दिया। उन्होंने दोहराया कि पनामा मध्य अमेरिका, लैटिन अमेरिका और कैरिबियन के लिए भारत का स्वाभाविक प्रवेश द्वार है। साथ ही, उन्होंने द्विपक्षीय व्यापार की संभावनाओं को पूरी तरह से इस्तेमाल करने के लिए पोत परिवहन संपर्क बेहतर करने, रसद साझेदारी को मज़बूत करने और संस्थागत सहयोग को तेज़ करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।

सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, “प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में, भारत का मैरीटाइम क्षेत्र विश्व स्तरीय मूलभूत ढ़ांचे, आधुनिक लॉजिस्टिक्स, ग्रीन शिपिंग और डिजिटल नवाचार के दम पर बदलाव के दौर से गुजर रहा है। हमारा दृष्टिकोण सिर्फ बंदरगाह बनाना नहीं है, बल्कि ऐसी साझेदारी बनाना है, जो अर्थव्यवस्थाओं को जोड़े और साझा समृद्धि लाए। अपनी रणनीतिक समुद्री ताकत के साथ पनामा इस सफर में एक स्वाभाविक साझेदार है और हम मिलकर एक ज़्यादा मज़बूत, कुशल और भविष्य के लिए तैयार वैश्विक समुद्री व्यवस्था बना सकते हैं।”

सोनोवाल ने समुद्री परिवहन और बंदरगाह विकास पर द्विपक्षीय समझौते पर बातचीत तेज़ करने, ग्रीन शिप रीसाइक्लिंग में सहयोग बढ़ाने, नाविकों के कल्याण और कौशल विकास को मज़बूत करने और बंदरगाहों के आधुनिकीकरण, वेयरहाउसिंग, डिजिटल इनोवेशन और समुद्री ढ़ांचे में सहयोग को बढ़ावा देने का भी प्रस्ताव रखा। दोनों पक्ष मज़बूत संस्थागत साझेदारी के ज़रिए बातचीत को आगे बढ़ाने पर सहमत हुए और भारत ने पनामा के समुद्री मामलों के मंत्री को नई दिल्ली में होने वाले इंडिया मैरीटाइम वीक 2026 में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया।

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