
ब्रिक्स देशों के बौद्धिक संपदा (आईपी) कार्यालयों के प्रमुखों की 18वीं बैठक का दूसरा दिन आज, 2 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित किया गया। भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के अंतर्गत पेटेंट, डिजाइन और व्यापार चिह्न के महानियंत्रक का कार्यालय (ओ/ओ सीजीपीडीटीएम) द्वारा आयोजित तीन दिवसीय बैठक 1 से 3 सितंबर 2026 तक आयोजित की जा रही है। बैठक में वर्चुअल और भौतिक दोनों माध्यमों से लगभग 35 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। रूस, ईरान और इथियोपिया के प्रतिनिधि ऑनलाइन शामिल हुए, जबकि शेष सदस्य कार्यालयों के प्रतिनिधियों ने बैठक में प्रत्यक्ष रूप से भाग लिया। ब्रिक्स सदस्य देशों के आईपी कार्यालयों के प्रमुखों ने वैश्विक नवाचार, रचनात्मकता और आर्थिक विकास के एक प्रमुख प्रेरक के रूप में बौद्धिक संपदा के क्षेत्र में बहुपक्षीय सहयोग को बढ़ाने की अपनी साझा प्रतिबद्धता दोहराई।
विचार-विमर्श भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के विषय, “लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और सततता के लिए निर्माण”, के अनुरूप रहा, जिसमें इस बात पर प्रकाश डाला गया कि किस प्रकार आईपी ढांचे तकनीकी लचीलेपन और सतत आर्थिक विकास को बढ़ावा देते हैं।
आईपी ब्रिक्स के जारी विचार-विमर्श के एक प्रमुख परिणाम के रूप में बैठक ने परिणामोन्मुख सहयोग का मार्गदर्शन करने, सीमा-पार नवाचार को बढ़ावा देने और वैश्विक आईपी मानकों को आकार देने के संयुक्त प्रयासों को मजबूत करने के लिए अद्यतन परिचालन दिशानिर्देशों को अपनाया।
आईपी ब्रिक्स कार्यालयों के प्रमुखों ने साझा सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत के हिस्से के रूप में पारंपरिक ज्ञान और चिकित्सा की पारंपरिक प्रणालियों के महत्व को रेखांकित किया तथा उनकी सुरक्षा और संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया। बैठक में ब्रिक्स में सुदृढ़ पेटेंट परीक्षा सहयोग पर अध्ययन के तहत प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने, लंबित मामलों को कम करने और खोज परिणामों के आदान-प्रदान में सुधार की दिशा में हुई प्रगति पर भी ध्यान दिया गया। बैठक में पेटेंट एनालिटिक्स और लैंडस्केप स्टडीज के माध्यम से तकनीकी विकास को समर्थन देने में आईपी ब्रिक्स कार्यालयों की भूमिका को भी रेखांकित किया गया तथा ब्रिक्स बाजारों में दक्षता बढ़ाने और भौगोलिक संकेतकों (जीआई) वाले उत्पादों के संरक्षण एवं व्यावसायीकरण को मजबूत करने के लिए पेटेंट एनालिटिक्स और भौगोलिक संकेतकों (जीआई) से संबंधित निष्कर्षों को स्वीकार किया गया।
बैठक में संस्थागत सहभागिता को और गहरा करने के लिए नई परियोजनाओं पर विचार-विमर्श पूरा किया गया। इनमें ब्रिक्स बौद्धिक संपदा जागरूकता श्रृंखला, आईपी ब्रिक्स फिनटेक इनोवेशन मॉनिटर, ब्रिक्स औद्योगिक संपदा व्यावसायीकरण फोरम और सर्वोत्तम प्रथाओं का रिपॉजिटरी, सार्वजनिक स्वास्थ्य और विकास के लिए बौद्धिक संपदा नीतियों से संबंधित पहल, ब्रिक्स की डिजाइन प्रणालियों पर अनुसंधान तथा ब्रिक्स देशों के पेटेंट दस्तावेजीकरण और सूचना संसाधनों का मैनुअल शामिल हैं।
आईपी ब्रिक्स कार्यालयों के प्रमुखों ने आईपी ब्रिक्स समूह के अंतर्गत परियोजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन और सहयोग की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए समन्वय तंत्र और प्रगति की आवधिक समीक्षा के महत्व पर बल दिया।
आईपी ब्रिक्स कार्यालयों के प्रमुखों सहित भाग लेने वाले प्रतिनिधियों ने बैठक के सफल आयोजन के लिए पेटेंट, डिजाइन और ट्रेड मार्क के नियंत्रक जनरल का कार्यालय (ओ/ओ सीजीपीडीटीएम), वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया। वैश्विक बौद्धिक संपदा क्षेत्र में भारत के बढ़ते प्रभाव को दर्शाते हुए, वर्ष 2026 में भारत की अध्यक्षता में इस वार्षिक बैठक की मेजबानी करना ओ/ओ सीजीपीडीटीएम के लिए अत्यंत गर्व का विषय रहा।



