
नागरिक उड्डयन मंत्रालय, भारत सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण (आईएफएससीए) और फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) के साथ मिलकर शुक्रवार,08 मई 2026 को गुजरात के गांधीनगर स्थित गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी (गिफ्ट सिटी) में भारत विमान पट्टा एवं वित्तपोषण सम्मेलन 2.02.0 (आईएएलएफएस 2.0) के दूसरे संस्करण का आयोजन सफलतापूर्वक किया। इस शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री श्री राम मोहन नायडू ने की और गुजरात के मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
इसके पहला संस्करण 2025 में हुआ था जिसकी सफलता को आगे बढ़ाते हुए आईएएलएफएस 2.0 ने नीति, वित्तपोषण एवं विमानन उद्योग के विशेषज्ञों को एक साथ लाकर विमान पट्टे एवं विमानन वित्तपोषण में गिफ्ट आईएफएससी की भूमिका को मजबूत करने पर विचार-विमर्श किया, जिसमें गिफ्ट आईएफएससी को एक उभरते वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित करने पर ध्यान केंद्रित किया गया।
मुख्य अतिथि के रूप में अपने संबोधन में, गुजरात के मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल ने वैश्विक वित्तीय और फिनटेक हब के रूप में गिफ्ट सिटी को मजबूत करने के लिए गुजरात की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने नए हवाई अड्डे विकास परियोजनाओं सहित गुजरात के बढ़ते विमानन अवसंरचना का भी उल्लेख किया और वैश्विक हितधारकों को राज्य के विमानन विकास में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया।
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री श्री राम मोहन नायडू किंजरापु ने अपने विशिष्ट अतिथि संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत न केवल दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते विमानन बाजारों में से एक के रूप में बल्कि एक उभरते हुए वैश्विक विमान पट्टा एवं विमानन वित्तपोषण के क्षेत्र में भी अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। उन्होंने आने वाले वर्षों में विमान श्रेणियों में भारत के वाणिज्यिक बेड़े में महत्वपूर्ण विस्तार होने का अनुमान लगाया और इस विकास को समर्थन देने के लिए एक मजबूत घरेलू वित्तपोषण एवं पट्टा पारिस्थितिकी तंत्र की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया।
पट्टा क्षेत्र में मौजूद अवसरों की विशालता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा, “भारत के वाणिज्यिक विमान बेड़े के 2027 तक 1,100 विमानों तक पहुंचने और 2035 तक 2,250 से अधिक विमानों तक विस्तार होने की उम्मीद है। भारतीय विमानन कंपनियों के पास वर्तमान में 1,640 विमानों की डिलीवरी लंबित है। इसका मतलब है कि आने वाले दशक में भारत की पट्टा पारिस्थितिकी तंत्र के लिए 50 अरब अमेरिकी डॉलर का अवसर मौजूद है।”
श्री राम मोहन नायडू ने पहले भारत विमान पट्टा एवं वित्तपोषण सम्मेलन के बाद पूरी की गई प्रमुख प्रतिबद्धताओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने विमान वस्तुओं में हितों के संरक्षण (पीआईएओ) अधिनियम, 2025 के अधिनियमन का उल्लेख किया और इसे एक ऐतिहासिक सुधार करार दिया जो भारतीय कानूनी संरचना को केपटाउन सम्मेलन के अनुरूप बनाता है। उन्होंने कहा, “कई वर्षों से, पट्टा देने वाली कंपनियों को अपने इडेरा अधिकारों का प्रयोग करने में बहुत देरी का सामना करना पड़ रहा था जिससे भारतीय एयरलाइनों की लागत बढ़ रही थी और अंततः यात्रियों पर हवाई किराए में वृद्धि के रूप में इसका प्रभाव पड़ रहा था। अब इस कमी को दूर किया गया है।”
मंत्री ने आगे कहा कि पहले शिखर सम्मेलन के समापन पर किया गया एक और महत्वपूर्ण गारंटी पट्टे के लिए एक उच्च स्तरीय हितधारक समिति का गठन करना था जिसे भी पूरा कर लिया गया है। केंद्रीय मंत्री श्री राम मोहन नायडू ने भारतीय एयरलाइनों की संचालन स्थिरता एवं दीर्घकालिक विकास सुनिश्चित करने के लिए सरकार के निरंतर समर्थन को उजागर किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने एटीएफ (एविएशन टर्बाइन ईंधन) की कीमतों में वृद्धि को 25 प्रतिशत तक सीमित कर दिया है, सभी हवाई अड्डों पर लैंडिंग और पार्किंग शुल्क को 25 प्रतिशत कम किया है और एयरलाइनों को क्रेडिट समर्थन उपाय प्रदान किए हैं। हाल ही में हुई मंत्रिमंडल द्वारा लिए गए एक निर्णय का उल्लेख करते हुए, उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने 5,000 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता योजना (क्रेडिट लाइन गारंटी योजना) को मंजूरी दी है, जिसका उद्देश्य एयरलाइनों को होने वाले नगदी दबाव को कम करना ह जो कि दुनिया की किसी भी अन्य सरकार ने नहीं किया है।



