केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने नवाचार और समावेशिता पर 10वें राष्ट्रीय स्वास्थ्य शिखर सम्मेलन का किया उद्घाटन
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी और हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री श्रीमती आरती सिंह राव

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी और हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री श्रीमती आरती सिंह राव की उपस्थिति में नवाचार एवं समावेशिता: भारत के स्वास्थ्य भविष्य को आकार देने वाली सर्वोत्तम प्रथाएं विषय पर 10वें राष्ट्रीय स्वास्थ्य शिखर सम्मेलन का उद्घाटन किया।
यह सम्मेलन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए स्वास्थ्य क्षेत्र में विशिष्ट नवाचारों और सर्वोत्तम प्रथा प्रदर्शित करने का प्रमुख मंच है, जिसका उद्देश्य देश भर में समावेशी, सुलभ और सस्ते दर पर स्वास्थ्य सेवा विस्तारित करना है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने अपने संबोधन में सम्मेलन की मेजबानी के लिए हरियाणा सरकार का आभार व्यक्त करते हुए और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में नवाचारों को बढ़ावा देने में राज्य की सराहना की। श्री नड्डा ने कहा कि यह शिखर सम्मेलन दर्शाता है कि व्यावहारिक, जमीनी स्तर पर संचालित रणनीतियां सामूहिक रूप से प्रभावी और दायित्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को आकार दे सकती है।
केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने इस अवसर पर आरंभ किए गए पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि इनका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के लिए कामकाज सुगम बनाना, सेवा वितरण बेहतर बनाना और स्वास्थ्य सेवा में सुधार लाना है। उन्होंने कहा कि इनका लक्ष्य कुशल, एकीकृत और सेवा प्रदाताओं एवं लाभार्थियों दोनों की आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशील प्रणालियों को सक्षम बनाना है।
केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने पिछले एक दशक में भारत के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में हुए बदलावों की चर्चा करते हुए कहा कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में देश ने विकसित भारत के दृष्टिकोण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है। उन्होंने कहा कि इस यात्रा में एक अहम पड़ाव उपचारात्मक दृष्टिकोण से आगे बढ़कर व्यापक और समग्र स्वास्थ्य सेवा ढांचे की ओर बदलाव है। उन्होंने बताया कि 2002 की राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति मुख्य रूप से उपचारात्मक देखभाल पर केंद्रित थी, पर 2017 की राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति से स्वास्थ्य सेवा के निवारक, संवर्धक, उपचारात्मक और उपशामक पहलुओं को शामिल कर उल्लेखनीय बदलाव आया है, जिससे अधिक समावेशी और जन-केंद्रित प्रणाली सुनिश्चित हुई है।
श्री नड्डा ने 1 लाख 85 हजार से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया, जो अब करोड़ों के लिए प्राथमिक संपर्क केन्द्र के रूप में कार्य करते हैं। इन केंद्रों ने निवारक स्वास्थ्य देखभाल को काफी मजबूत बनाया है, जिसमें 30 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए उच्च रक्तचाप, मधुमेह और कैंसर (मुंह, स्तन और गर्भाशय ग्रीवा) जैसी गैर-संक्रामक बीमारियों की बड़े पैमाने पर जांच शामिल है।
स्वास्थ्य मंत्री ने समेकन और गुणवत्ता संवर्धन की दिशा में आगे बढ़ने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि 50 हजार से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानकों के तहत प्रमाणित किया गया है, फिर भी गुणवत्ता प्रमाणन को और अधिक बढ़ाने और लगातार बेहतर प्रदर्शन और सकारात्मक परिणाम सुनिश्चित करने के लिए नियमित आकलन मजबूत बनाने की आवश्यकता है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने प्रमुख स्वास्थ्य उपलब्धियों की चर्चा करते हुए कहा कि संस्थागत प्रसवों (मान्यता प्राप्त चिकित्सा केंद्र-अस्पताल, स्वास्थ्य केंद्र में प्रशिक्षित चिकित्सा कर्मियों की देखरेख में सुरक्षित प्रसव) में 79 प्रतिशत से 89 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो मातृ स्वास्थ्य सेवाओं तक बेहतर पहुंच को दर्शाती है। उन्होंने कहा मातृ मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आई है और पिछले कई वर्षों से इसमें निरंतर प्रगति रही है। स्वास्थ्य मंत्री ने हाल के वैश्विक अनुमानों का हवाला देते हुए बताया कि भारत ने पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर में 79 प्रतिशत और शिशु मृत्यु दर में 73 प्रतिशत की कमी की है। उन्होंने रोग नियंत्रण में भी भारत की प्रगति का लेख किया। उन्होंने कहा कि विश्व की लगभग एक-छठीं जनसंख्या होने के बावजूद, भारत में वैश्विक मलेरिया के बोझ का केवल छोटा हिस्सा है। इसी प्रकार, भारत में तपेदिक के मामलों में वैश्विक औसत से अधिक तेजी से गिरावट आई है और उपचार दायरा 92 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
श्री नड्डा ने जन स्वास्थ्य के क्षेत्र में हासिल प्रमुख उपलब्धियों का भी उल्लेख किया, जिनमें 2014 में भारत को पोलियो मुक्त घोषित किया जाना, 2015 में नवजात शिशुओं में होने वाले टिटनेस का उन्मूलन और ट्रेकोमा (बैक्टीरिया से होने वाला आंखों के अत्यंत संक्रामक संक्रमण है, का जन स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय न होना शामिल है। विश्व स्वास्थ्य संगठन अनुसार, भारत अब ट्रेकोमा मुक्त देश घोषित है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत निकट भविष्य में काला-अजार के उन्मूलन की दिशा में अग्रसर है।
उभरती चुनौतियों का उल्लेख करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने गैर-संक्रामक रोगों के बढ़ते बोझ बोझ की चर्चा की और प्रभावी जांच, समय पर निदान और निरंतर देखभाल के लिए आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को और बेहतर बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि हालांकि देश भर में बड़े पैमाने पर स्क्रीनिंग (निवारक स्वास्थ्य प्रक्रिया जिसके द्वारा रोग के कोई लक्षण न होने पर भी, किसी आबादी में बीमारी की संभावना या शुरुआती संकेतों का पता लगाया जाता है) की गई है, लेकिन अब समय पर अनुवर्ती कार्रवाई, उपचार और रेफरल तंत्र (रोगी को कम सुविधाओं वाले केंद्र से बेहतर विशेषज्ञों, संसाधनों या सेवाओं वाले उच्च केंद्र में भेजा जाना) सुनिश्चित करने पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है।
श्री नड्डा ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत बेहतर योजना और कार्यान्वयन की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि संसाधनों के अधिकतम उपयोग के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारियों और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों सहित जमीनी स्तर के अधिकारियों में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के प्रावधानों के बारे में अधिक जागरूकता आवश्यक है। उन्होंने उत्तरदायित्व और बेहतर परिणाम सुनिश्चित करने के लिए समय पर निधियों के उपयोग, हितधारकों के बीच बेहतर तालमेल और जन प्रतिनिधियों के साथ सक्रिय भागीदारी के महत्व पर भी बल दिया।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने अपने संबोधन के समापन में कहा कि वित्तीय संसाधन उपलब्ध हैं, लेकिन सफलता का राज उनके प्रभावी और समयबद्ध उपयोग में निहित है। सुदृढ़ शासन, बेहतर संचार और अंतिम छोर तक कार्यान्वयन सुनिश्चित करना भारत के लिए सशक्त, समावेशी और भविष्योन्मुखी स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण होगा।
हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने अपने संबोधन में सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों को सुदृढ़़ बनाने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने और आपसी ज्ञान को बढ़ावा देने के महत्वपूर्ण मंच के रूप में शिखर सम्मेलन के महत्व का उल्लेख किया।



